अरवल / पचदेवरा। (हरदोई) पचदेवरा थाना क्षेत्र के गिरधरपुर निवासी कोटेदार के पति की मैकपुर जाते समय खनन के गड्ढे में भरे पानी को पार करते समय डूबने से मौत हो गई। घटना से ग्रामीण आक्रोशित हाे गए। मौके पर पहुंचे लेखपाल को घसीटकर गड्ढे में भरे पानी में फेंकने की कोशिश की गई, तो लेखपाल ने जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि समेत छह लोगों को नामजद करते हुए 10-15 अज्ञात लोगों पर भी रिपोर्ट दर्ज करा दी। इस सबके बीच चर्चा है कि लेखपाल की पांच लाख रुपये के लिए डूब जाते हैं.... की टिप्पणी से बात बिगड़ी और विवाद हो गया।
पचदेवरा थाना क्षेत्र के गिरधरपुर गांव से कुछ ही दूरी पर एक्सप्रेस-वे भी निकला है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण में मिट्टी की जरूरत थी। इसके लिए क्षेत्रीय किसानों की जमीनों से खनन की अनुमति लेकर खनन किया गया था। खनन के बाद हुए गड़्ढों में इन दिनों पानी भरा हुआ है। गिरधरपुर निवासी अशोक दाढ़ी बनवाने के लिए रविवार सुबह मैकपुर जा रहे थे। इस दौरान खनन के गड्ढे में भरे पानी को पार करते समय वह डूब गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई। अशोक की पत्नी सरला देवी के पास गांव का कोटा भी है। पति की मौत की जानकारी पर वह बदहवास हो गई। कुछ ही देर में घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। इसी दौरान जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि लुधियापुर निवासी श्याम सिंह मौके पर पहुंच गए और घटना की जानकारी पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों को दी। मौके पर लेखपाल अकील हनीफ मिर्जा राजस्व विभाग के अधिकारियों और पुलिस के पहुंचने के बाद मौके पर गए। इस बीच ग्रामीण आक्रोशित हो गए और हनीफ के साथ अभद्रता कर दी। हनीफ ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि घटना की जानकारी पर जब वह मौके पर गए तो जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि श्याम सिंह, गिरधरपुर निवासी गाेविंद दीक्षित, अनमोल दीक्षित, मैकपुर निवासी रघुवीर सिंह और इनके पुत्रों, अमित सिंह व सूरज व 10 - 15 अज्ञात लोगों ने घसीटकर पानी भरे गड्ढे में फेंकने की कोशिश की। पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बचाया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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दो दिन पहले एक डूबा, एक साल पहले चार डूबे पर बेपरवाह हैं राजस्व के कर्मचारी
जिस गड्ढे में रविवार को अशोक की डूबकर मौत हुई। उसी घटना में दो दिन पहले मैकपुर निवासी दस साल के करन राठौर की भी डूबकर मौत हुई थी। एक साल पहले भी इसी गड्ढे में डूबकर चार बच्चों की मौत हुई थी। बावजूद इसके राजस्व विभाग के तहसील स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने कोई सबक नहीं लिया। न तो आस पास बैरीकेडिंग कराई गई और न ही आवागमन बंद कराने का कोई प्रयास हुआ। खनन करने वाली कंपनी की ओर से भी सुरक्षा कराए जाने का प्रावधान रहता है, लेकिन यहां ऐसा भी नहीं हुआ। यही वजह रही कि ग्रामीणों में आक्रोश ज्यादा हो गया।
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लेखपाल की टिप्पणी से खड़ा हुआ बवाल
ग्रामीणों के मुताबिक जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि श्याम सिंह ने घटना की जानकारी लेखपाल अकील हनीफ मिर्जा को दी। मौके पर पहुंचे लेखपाल ने ग्रामीणों के बीच कह दिया कि लोग यहां डूबने ही आते हैं ताकि उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा मिल सके। इस बात पर ग्रामीण ज्यादा आक्रोशित हो गए और लेखपाल के साथ अभद्रता की।