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अब श्रम बजट अधर में लटका

Mon, 12 Jan 2015 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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मनरेगा जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ी जा रही है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मनरेगा योजना का श्रम बजट तैयार किया जाना है, पर जनपद से अभी तक बजट मंगवाने को लेकर कोई रूपरेखा बनाकर नहीं भेजी जा सकी। जिले के विकास खंडों से मनरेगा से होने वाले संभावित कार्याें का कोई ब्योरा ही अभी जिला मुख्यालय पर नहीं दिया गया। जिसको लेकर शासन ने भी नाराजगी जताई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के अंतर्गत होने वाले कार्याें को कराने को प्रति वित्तीय वर्ष में आगामी वित्तीय वर्ष का श्रम बजट तैयार कर शासन को भेजा जाता है। जिसके बाद वहां से धनराशि आने पर उसी के अनुसार ही जाब कार्ड धारकों को काम मुहैया कराया जाता है।

मनरेगा के अंतर्गत श्रम बजट बनाने को लेकर शासन से जिले के ब्लाक स्तरीय अफसरों को बजट तैयार करने के निर्देश दे दिए गए, पर जिम्मेदारों की लापरवाही इस कदर है कि श्रम बजट तैयार करके अभी तक शासन से अनुमोदन को नहीं भेजा जा सका। श्रम बजट में ग्रामीण संपर्क मार्ग, बाढ़ नियंत्रण, जल संचयन, सूखा, लघु सिंचाई सहित तमाम कार्यों को कराने के लिए श्रम और सामग्री का संयुक्त रूप से बजट तैयार करना होता है और उसका अंकन एमआईएस पर कराया जात है।
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ताकि शासन से श्रम बजट के लिए अनुमोदन मिल सके। आगामी वित्तीय वर्ष 15-16 का श्रम बजट तैयार होकर चला जाना चाहिए था, पर अभी तक जनपद के किसी भी ब्लाक से बजट तैयार कर नहीं भेजा गया है। हालांकि मल्लावां ब्लाक से आगामी वित्तीय वर्ष में होने वाले सिर्फ 13 कार्यों की डिमांड भेजी गई है।

जिसमें भी आठ कार्य ग्रामीण संपर्क मार्ग के हैं, जबकि जल संचयन, बाढ़ और भूमि से संबंधित एक-एक कार्य का बजट तैयार किया गया। जिले के अफसरों को 10 जनवरी तक श्रम बजट तैयार कर एमआईएस पर अंकित करना था, पर यह कार्य अभी तक अधूरा है।

जिले से श्रम बजट अभी तक एमआईएस पर फीड न होने पर अपर आयुक्त ग्राम्य विकास डा. आदर्श सिंह ने भी नाराजगी व्यक्त की है। अपर आयुक्त ने 13 जनवरी तक समय दिया है। उधर, जिले में अभी तक मनरेगा का आगामी वित्तीय वर्ष का श्रम बजट तैयार नहीं हुआ, वहीें ग्राम्य विकास आयुक्त ने श्रम बजट पर 16 जनवरी को गहन समीक्षा करने का आदेश दे दिया।

ऐसे में अब जिले के अफसरों को न सिर्फ श्रम बजट तैयार कराना है, बल्कि समीक्षा बैठक के लिए भी तैयारी करनी है, पर जब श्रम बजट ही नहीं बना है तो समीक्षा बैठक की तैयारी होना भी असंभव लग रही है।
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