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कलियुग में प्रभु का नाम लेने से दूर होते पाप

Sun, 21 Jun 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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क्षेत्र के गांव रूद्दीखेड़ा स्थित केपी सिंह इंटर कालेज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य प्रेम जी महाराज ने कहा कि कलियुग में केवल प्रभु का नाम लेने मात्र से ही पाप कट जाते हैं और परमधाम की प्राप्ति होती है।
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आचार्य ने कहा कि अजामिल के प्राण निकलने पर वह अपने बेटे नारायण को पुकारने लगा, जिस पर अंतिम समय में नारायण को पुकारने पर भगवान ने उसके सारे पाप नष्ट कर दिए और वह बैकुंठ धाम को चला गया। इस अवसर पर आचार्य ने भक्त ध्रुव की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि यदि व्यक्ति के मन में संकल्प शक्ति हो तो वह कम समय में ही ईश्वर को प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जब ध्रुव की विमाता सुरुचि ने उसे पिता की गोद से उतार दिया तो वह व्याकुल होकर अपनी माता सुनीति के पास पहुंचा और सारा वृत्तांत सुनाया। इस पर सुनीति ने कहा कि बेटा सबका पिता परमात्मा है, उसकी गोद में बैठो वहां से तुम्हें कोई नहीं उतार पाएगा।
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इस पर ध्रुव ने भगवान की गोद में बैठने की ठान ली और महल छोड़कर जंगल चला गया। वहां पर उसकी देवर्षि नारद से भेंट हुई। देवर्षि ने उसे भगवान को प्राप्त करने का माध्यम बतलाया। जिसका पालन करते हुए भगवान ध्रुव के समक्ष प्रकट हुए और वरदान देकर उसे अपनी गोद में बैठाकर आशीर्वाद दिया कि उसकी कीर्ति सदैव स्थापित रहेगी।

जिस कारण आज भी आकाश गंगा में भक्त ध्रुव के ध्रुव तारे के रूप में दर्शन किए जाते हैं। कथा के बाद भगवान की आरती हुई और प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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