सावन मास में भक्तों द्वारा मंदिरों में भगवान शिव का
पूजन अर्चन जारी है। सावन के दूसरे सोमवार को जिले के सभी मंदिरों में
सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। सुबह से लेकर देर शाम तक जिले भर के
शिवालयों में बम-बम भोले के ही जयघोष सुनाई दिए।
शहर के बाबा विश्वनाथ
मंदिर, तुरंतनाथ मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बाबा नील कंठेश्वर महादेव,
शिव भोले मंदिर, सहाका मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, मंशानाथ मंदिर में भक्तों
द्वारा दिन भर पूजन का आयोजन होता रहा। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना
है कि सावन मास में शिव को शिव षडक्षरी मंत्र ऊं नम: शिवाय बोलते हुए जल से
अभिषेक कर गंध, अक्षत फूल चढ़ाएं। साथ में काले तिल भी अर्पित करें।
भगवान
शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाकर आरती कर शनि दशा से मुक्ति पाई जा सकती
है। सावन मास अपने आप में ही इतना पावन है कि हर हाथ खुद भगवान शिव की
आराधना करने को उठते हैं, तो हर जुबान पर बम भोले के स्वर आ ही जाते हैं।
इसी तरह भगवान शिव भी इस माह आशीर्वाद देने को अपने हाथों को खुला ही रखते
हैं।
इसलिए भगवान शिव की कृपा पाने को इससे अच्छा मौका श्रद्धालुओं के
पास कोई नहीं है, तो शनि दशा में सुधार को लेकर भी भगवान शिव के पास से
होकर रास्ता गुजरता है, इसलिए विधि-विधान से पूजन कष्टों का निवारण कर सकता
है। भोले भंडारी का पूजन करते समय दिशा का सदैव ध्यान रखे।
उधर, जानकारों
का कहना है कि सावन मास में सुबह पूजन करते समय पूर्व दिशा में ही बैठकर
पूजन करें, तो शाम को पश्चिम दिशा में बैठकर करें। दूध, दही, शहद, घी,
रोली, फूल, बेलपत्र आदि से पूजन और विधिवत आरती करनी चाहिए। इसके अलावा
सावन मास में जब भी मौका मिले तो ऊँ नम: शिवाय का जाप करते रहना चाहिए।
उधर, शिव के चहेते माह सावन में यदि कोई भक्त पूरे माह भूखों को भोजन कराता
रहे तो उसे आजीवन कभी अन्न की कमी नहीं होगी। शास्त्रों के जानकार
सुनील शास्त्री का भगवान शिव की कृपा के बारे में कुछ ऐसा ही कहना है। उनका
कहना है कि भोले भंडारी अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं करते, वह हमेशा
उनकी मनोकामना को पूरी करने में तत्पर रहते हैं, बशर्ते भक्त भी हृदय से
उनका पूजन अर्चन करता हो।