टड़ियावां। थाना क्षेत्र के भौंता गांव में बृहस्पतिवार सुबह बंदर के झपटने से गोद में तीन माह की बहन को खिला रही सात वर्षीय बच्ची गर्म दूध की कढ़ाई में गिर गई। हादसे में दोनों बहने गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजन उन्हें एंबुलेंस से सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
भौंता गांव में बढ़ता बंदरों का आतंक हादसों का सबब बनता जा रहा है। बृहस्पतिवार सुबह गांव निवासी जमुना की दो पुत्रियां बंदरों के आतंक का शिकार होकर गंभीर रूप से झुलस गईं। जमुना की पत्नी फूलमती ने बताया कि सुबह करीब सात बजे वह घर में मिट्टी के चूल्हे पर कढ़ाई में दूध गर्म कर रही थीं। इस दौरान उनकी सात वर्षीय बेटी अंजली पास रखे तख्त पर बैठी थी और उसकी गोद में तीन माह की अंशिका खेल रही थी। अचानक घर में बंदर ने अंजली को झपटने का प्रयास किया। इससे वह घबरा गई और पीछे हटते समय संतुलन खो बैठी। वह गोद में बच्ची समेत गर्म दूध की कढ़ाई में जा गिरी। चीख-पुकार सुनकर परिजन दौड़े और दोनों को बाहर निकाला। गंभीर हालत में सीएचसी लेकर गए वहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
बंदरों के आंतक से लोग परेशान
गांव वालों के मुताबिक बंदर पहले भी कई लोगों को काट चुके हैं और उनके हमलों से घटनाएं होती रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों को पकड़वाने के साथ गांव में अभियान चलाकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की। फूलमती का कहना है कि बंदरों को पकड़वाने के लिए कई बार प्रधान के माध्यम से ब्लॉक स्तर पर शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बंदर घरों में घुसकर खाद्य सामग्री और सामान उठा ले जाते हैं। कपड़े फाड़ने के साथ फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।