मौसम के तेवर काफी तीखे हो चुके है। सर्द हवाओं के
साथ छाई रहने वाली बदली पारे को लगातार लुढ़का रही, जिससे लोगों के कंपकंपी
छूटने लगी है। सबसे ज्यादा परेशानी आशियाना विहीन गरीबों एवं दिहाड़ी
कामगारों को हो रही है। दिन का समय तो जैसे तैसे निकल जाता है, मगर कोहरे
एवं शीत लहर के आगोश में समाती स्याह सर्द रातें अब गरीबों के लिए आफत बनने
लगी हैं।
इसके बाद भी सार्वजनिक स्थानों पर नियमित अलाव नहीं जल रहे,
जिससे गरीब तबके के लोग खुले आसमान के नीचे पड़ाव डालने के लिए मजबूर है।
बीती रात कुछ इसी तरह के नजारे अमर उजाला टीम को शहर में दिखाई पड़े। कहीं
अलाव न होने से यात्री कंपकंपा रहे थे, तो कहीं ड्यूटी पर तैनात पुलिस
कर्मी जैसे तैसे आग जलाकर ठंड दूर करने का प्रयास कर रहे थे।
इस तरह से बात
आइने की तरह साफ है रेलवे स्टेशन, अस्पताल तथा प्रमुख चौराहों पर अलाव की
समुचित व्यवस्थाएं न होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा और
जिम्मेदार बेखबर बने हुए है। खास बात यह है कि नगर पालिका तथा तहसील
प्रशासन दोनों के द्वारा ही सभी प्रमुख स्थानों पर अलावों की समुचित
व्यवस्था के दावे किए जाते हैं, पर हकीकत कुछ और है।
शहर में अलावों की
समुचित व्यवस्था के अभाव में घंटाघर रोड, सरकुलर रोड आदि पर लोग कूड़ा और
फटे टायर जलाकर आग तापते नजर आए।
रात्रि 10:30 बजे। रेलवे स्टेशन परिसर में प्रवेश करते ही पास में ही स्थित
पेशाब घर की दुर्गंध से लोगों को दो चार होना पड़ रहा है। पेशाब घर के पास
ही यात्री प्रतीक्षालय है। सर्दी इतनी ज्यादा है कि यहां कुछ यात्री लेटे
हुए है, तो सर्दी से बचने को जैसे-तैसे खुद को कंबल आदि से बचाने का प्रयास
कर रहे है। यहां अलाव न होने के कारण लोग सर्द हवाओं से बचने और ट्रेन के
इंतजार में जैसे तैसे पड़े हुए हैं।
समय
10:45 बजे। प्लेटफार्म प्रवेश द्वार के पास भी अलाव न होने के कारण जहां
तमाम यात्री वहीं पास में ही जमीन पर बैठकर और लेट कर ट्रेन के आने के
इंतजार में समय बिता रहे है, तमाम लोग टिकट घर के पास एवं प्रवेश द्वार के
पास सर्दी से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
समय
11:05 बजे। प्लेटफार्म प्रवेश द्वार के पास ही तमाम आटो रिक्शा वाले खड़े
हुए हैं और रिक्शा वाले मौजूद हैं। यहां भी अलाव न होने से रिक्शे वाले
रिक्शों पर ही मुंह ढंक कर किसी तरह से रात बिताने का प्रयास कर रहे है।
यहां बड़ी संख्या में यात्री एवं आटो चालक तथा रिक्शा चालक जहां जिस हाल
में जगह मिली की तर्ज पर सर्दी से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
समय
11:15 बजे। इमरजेंसी वार्ड के पास कुछ तीमारदार तथा तथा लोग इधर उधर अलाव
की तलाश कर रहे हैं, तभी किसी को पता चला कि अलाव जलाने के नाम पर यहां कुछ
दो चार लकड़ी पड़ी हुई है। उन्हेें एकत्र कर वे आग जलाकर सर्दी से बचने का
प्रयास करने लगते है। यहां भी न तो कही विशेष रूप से अलाव की व्यवस्था
दिखाई पड़ी और न हीं रैन बसेरा के इंतजाम दिखे।
समय
11:25 बजे। सिनेमा चौराहे पर सन्नाटा पसरा हुआ है। इस सन्नाटे को अगर कोई
दूर कर रहा है तो वे है चेकपोस्ट पर तैनात पुलिस कर्मी जो ड्यूटी
के लिए किसी तरह से आग की व्यवस्था कर आग ताप रहे और इधर-उधर रिक्शा बाले
रिक्शों पर सो रहे है। यहां भी अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई पड़ी।
नुमाइश चौराहा के आस पास भी समुचित अलाव के इंतजाम नहीं दिखाई पड़े।