हरदोई। सरकारी भूमि की बंदरबांट पर अधिकारियों पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। 14 भूमिहीनों की अनदेखी और 71 अपात्रों को सरकारी भूमि के कृषि आवंटन पर शासन ने बड़ी कार्रवाई की है।
शासन ने तहसील सदर की तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार को सरकारी भूमि के मनमाने आवंटन पर निलंबित किया गया है। तत्कालीन एसडीएम स्वाति शुक्ला वर्तमान में फर्रुखाबाद में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) और तहसीलदार डॉ. प्रतीत त्रिपाठी वर्तमान में प्रोन्नति पाकर एटा में एसडीएम के पद पर तैनात थे। दोनों ही अधिकारियों को शासन से संबद्ध किया गया है।
तहसील सदर के फरीदापुर गांव में 14 भूमिहीनों को पट्टा न देकर 71 काश्तकारों को कृषि आवंटन दे दिया गया था। 71 काश्तकारों को करीब 150 बीघा से अधिक सरकारी भूमि के पट्टे दिए गए। फरीदापुर गांव में भूमि प्रबंध समिति ने गांव के 71 अपात्रों को भूमिहीन बताते हुए कृषि आवंटन के लिए नौ दिसंबर 2022 को प्रस्ताव तहसील भेजा था। इसी प्रस्ताव को तत्कालीन एसडीएम व तहसीलदार, नायब तहसीलदार ने 30 मई 2023 को स्वीकृति दी थी।
प्रकरण संज्ञान में आने पर डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने एडीएम प्रियंका सिंह से जांच कराई थी। कृषि आवंटन पाए लोग अपात्र और 14 पात्रों को वंचित बताया गया था। डीएम ने मामला न्यायालय में तलब कर लिया। मनमाने ढंग से किए गए पट्टे पर डीएम ने प्रस्ताव को निरस्त करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की संस्तुति की थी।
इस खबर को अमर उजाला ने 13 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव ने पूरी रिपोर्ट मांगी थी। इसी मामले में डीएम की संस्तुति पर तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजकुमार को डीएम और लेखपाल सोमेश शुक्ला को एसडीएम ने निलंबित कर दिया था। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव ने फर्रुखाबाद की एडीएम न्यायिक स्वाति शुक्ला और एटा के एसडीएम डॉ. प्रतीत त्रिपाठी का निलंबन आदेश जारी कर दिया है।