हरदोई। नौ दिन चले अढ़ाई कोस..., वाली कहावत यहां 101 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण पर चरितार्थ हो रही है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) ने चार माह में टेंडर की प्रक्रिया तक पूरी नहीं कर पाई है, ऐसे में सवाल उठता है कि काम क्या करा पाएंगे। आरईडी की लापरवाही में नौनिहालों के लिए बनने वाले केंद्रों के भवन फंसकर रह गए हैं।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में से 101 केंद्रों के भवन निर्माण की स्वीकृति शासन ने वर्ष 2022-23 में दी थी और 2023-24 में काम पूरा कराया जाना है। इसके लिए विभाग ने विभागीय अंश के तौर पर प्रति केंद्र दो लाख रुपये के हिसाब से जारी भी कर दी थी।
28 मार्च को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से कुल 2.02 करोड़ की राशि आरईडी के खाता में हस्तांतरित करा दी गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से राशि हस्तांतरित किए जाने के साथ ही सभी औपचारिकता पूरी करते हुए भवन निर्माण कराते हुए फोटो सहित रिपोर्ट भी प्रत्येक माह प्राप्त कराए जाने भी अनिवार्यता दी गई थी।
बताया गया कि जुलाई तक की प्रगति की स्थिति में खुलासा हुआ कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से भवन निर्माण तो दूर अभी तक टेंडर की भी प्रक्रिया पूरी नहीं कराई जा सकी है। आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए मार्च में मिली राशि के बाद आरईडी ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कराई। बताया गया कि अभी तक 101 भवनों के निर्माण में से 14 टेंडर फार्म ही बिक सके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब अभी तक टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं करा पाए हैं तो, भवनों का निर्माण समय से क्या करा पाएंगे। (संवाद)
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण के साथ और भी कई कामों को समय से शुरू नहीं कराया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के मार्च में राशि दिए जाने के बाद काम न कराए जाने के कारणों और अभिलेखों का परीक्षण कराया जाएगा। काम में देरी के लिए जो भी दोषी होगा, उत्तरदायित्व करते हुए कार्रवाई व शासन को लिखापढ़ी की जाएगी।
- मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी
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आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण की निदेशक के स्तर पर प्रति माह समीक्षा हो रही है लेकिन यहां पर 101 भवनों के निर्माण की स्थिति ठीक नहीं है। काम शुरू न होने से जनपद की ग्रेडिंग निम्नस्तर पर जा रही है। अधिशासी अभियंता से कहा गया है कि वह प्रक्रिया जल्द पूरी कराते हुए काम शुरू कराएं।
मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी