फोटो-23- कविता पाठ करते कवि नईम खां। संवाद
राधेश्याम त्रिपाठी की स्मृति में कवि सम्मेलन आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। पत्रकार राधेश्याम त्रिपाठी की स्मृति में ग्राम मझिला में कवि सम्मेलन हुआ। कवि श्याम त्रिवेदी ने पढ़ा कलम छू दे तो पत्थर भी शिलालेख हो जाते हैं। कवि सम्मेलन का शुभारंभ शीतल त्रिपाठी और करुणेश दीक्षित ने मां सरस्वती वंदना से किया।
अभिनव दीक्षित ने बेटियों पर रचना पढ़ी-बेटियों का बाप बन इतरा रहा हूं, प्रश्न मन में हैं उन्हें सुलझा रहा हूं। सतीश शुक्ल ने सुनाया-जब-जब भीष्म पितामह अपनी शक्ति क्षीण कर सोता है, द्रुपद सुता की तरह देश तब रोता है। आकाश त्रिपाठी ने सुनाया-रामजी की सेना के सिपाही हम, रास्ता ना मिले तो समुद्र पाट देते हैं। शायर नईम खान ने पढ़ा-महामूर्ख धनवान को कहते लोग महान। कितना भी विद्वान हो निर्धन गधा समान।
संचालन करते श्रीकांत सिंह ने सुनाया-दफ्तर में फाइल रखी मांगे दाम, बिना दाम के हो भला कैसे हो कोई काम। शायर फैज हैदर वारसी ,ओम दीक्षित,करुणेश दीक्षित, अरविंद मिश्र मो. हनीफ़ आदि ने भी काव्यपाठ किया। आयोजन में कांग्रेस नेता अजय सिंह, डॉ.मुरारीलाल गुप्ता, आयोजक शैलेंद्र त्रिपाठी, प्रभाकर त्रिपाठी, आकाश त्रिपाठी, लक्ष्मीकांत मिश्र, कमलेश रस्तोगी, गुफरान कौसर, उमा दीक्षित, प्रधान सरोज मिश्रा आदि मौजूद रहे।