अश्वमेध यज्ञ के तहत जारी प्रवचन में गायत्री तपोवन हरिद्वार के श्यामवीर सिंह ने कहा कि विचार क्रांति के लिए हमें स्वयं को भी तपाना होगा। विचारों के आंतरिक परिवर्तन के बिना मार्ग प्रशस्त करना कठिन है।
उन्होंने समझाया कि आज की विषम परिस्थितियों में विचार परिवर्तन के अचूक उपाय द्वारा हम सतयुग की वापसी कर सकते हैं। सच्चाई और उदारता हर एक को अपना कर्तव्य समझना चाहिए। जब भी पाप की अति होती है तब सतयुग की वापसी के लिए कई विशिष्ट उद्देश्यों के साथ ही महान आत्माओं के विभिन्न रूपों में अवतरण होते हैं। संसार को उनके द्वारा प्रशस्त मार्ग दिखलाया जाता है। पं. श्रीराम शर्मा के एक स्मरण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विचारों के लिए आंतरिक परिवर्तन और बिना मानवता की पुनर्स्थापना किए इस युग को सत्य की ओर प्रशस्त करना असंभव सा है। अनुशासित दिव्य चेतनाओं के द्वारा ही इस कार्य को संभव बनाया जा सकता है।
नारियों को देश के उदय का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि नारी जागरण तभी हो सकता है जब देश की हर बच्ची, हर नारी स्वयं को किसी भी परिस्थिति में अपने रो पुरुष से कम न समझें। स्वयं को प्रति संयोजित स्थिति में ढालने और सही मार्ग की ओर ले जाने का यही रास्ता है। उन्होंने आलस्यरहित अनुशासित जीवन जीने का सभी को प्रेरणा दी। उधर अश्वमेध यज्ञ के तीसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं ने कई पालियों में आहुतियां डालीं।