शनिवार रात आयोजित आल इंडिया मुशायरे में भारी भीड़
जमा हुई। इस दौरान शायर-शायरात ने जिंदगी के कई पहलुओं को अपनी शायरी का
विषय बनाकर श्रोताओं की वाहवाही हासिल की। कार्यक्रम का शुभारंभ
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने किया।
इसके बाद जमील
खैराबादी ने बारगाहे-रसूल सल्ल. में नाते पाक पेश की। बाजार इस्लामगंज
मैदान पर सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली की अध्यक्षता में हुए मुशायरे में
देश-विदेश में अलग पहचान रखने वाले शायर इमरान प्रतापगढ़ी की आवाज और कलाम
का जादू लोगों के सर चढ़ के बोला।
उन्होंने कई मशहूर नज्म और गजलें सुनाईं।
उन्होंने पढ़ा, कांपती है जमीं गुनाहों से। जलजले बेसबब नहीं आते। शायस्ता
सना के माइक पर आते ही जवां दिलोें की धड़कने तेज हो गईं। उन्होंने पढ़ा,
मजबूर हूं पैरों में जंजीर हया की है। और वो यह समझते हैं मैं प्यार नहीं
करती।
अज्म शाकिरी ने जिंदगी के फलसफे को एक शेर में बयान किया, जिंदगी के
नाम पर हम उम्र भर जीते रहे। जिंदगी को हमने पाया भी तो मर जाने के बाद। जमील
खैराबादी के लिए कलाम के साथ आवाज पर भी तालियां बजीं। उन्होंने पढ़ा,
मुसलसल गम का चर्चा कर रहा है।
ये कौन अपने को सस्ता कर रहा है। नदीम
फर्रूख के इस शेर पर उन्हें दाद मिली, जईफ बाप से जो बात तक नहीं करता।
अमीरे शहर को झुक कर सलाम करता है। मीसम गोपालपुरी ने इंतेहा ए मोहब्बत के
एक अहसास को शेर में ढाल दिया, मेरी हयात का सूरज तो ढल नहीं सकता। तेरे
बगैर मेरा दम निकल नहीं सकता।
सबा बलरामपुरी ने पढ़ा, खबर मिली है कि तू आज
आने वाला है। तेरी पसंद का खाना बनाए बैठी हूं। राशिद कमाल के शेरों के
साथ लहजे ने भी अवाम में हरारत पैदा की। मेरे रसूल की सुन्नत है ये फाका
मेरा। ऐ सितमगर मेरे हाथ में दरहमो दीनार न दे।
ताहिर फराज ने रोमांटिक
गजल पेश करते हुए पढ़ा, जिस दिन वह पाकीजा दामन आ जाएगा हाथ मेरे। आंखों का
यह मैला पानी गंगाजल हो जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय शायरों ने भी कलाम
पेश किया। इस मौके पर एसडीएम शाहाबाद मंशाराम, ब्लाक प्रमुख जयप्रकाश
गुप्ता, सरताज खां, चेयरमैन गोपामऊ वली मोहम्मद, डा. साजिद, मोहम्मद शकील
धुन्नन, चांद खां, फरकान मैनेजर आदि मौजूद थे।