दिल्ली से बलरामपुर घर जाने के लिए 700 किमी की दूरी तय करने निकले रिक्शा चालक और उसके साथी हरदोई के प?
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पिहानी। भूख से निढाल, बोझिल कदम और लंबा सफर। लॉकडाउन यूं तो सभी को परेशान कर रहा है, लेकिन घरों से दूर रहकर दिल्ली, नोएडा व गाजियाबाद जैसे महानगरों में मजदूरी करने वाले बेबस दिख रहे हैं। वह कहां रहेंगे और क्या खाएंगे, यही सोचकर पैदल लंबी डगर पर चल पड़े हैं। दो दिन से पैदल लोगों का जत्था सड़कों पर दिख रहा है। शनिवार को हाईवे पर ऐसे कामगारों की चहलकदमी दिखी।
एक रिक्शे पर सवार चालक ने अपना नाम दुर्गेश व पीछे बैठे चारों युवकों ने अपना नाम बालाजी, जगदीश, सूरज व राजू बताए। युवकों ने बताया कि वह सभी बलरामपुर के रहने वाले हैं और दिल्ली में रिक्शा चलाते हैं।
लॉकडाउन के फैसले से वह बेरोजगारी और भूख से परेशान थे। मजबूरन ही एक रिक्शे पर सात सौ किलोमीटर दूर घर वापसी के लिए निकल पड़े हैं। गुरुवार को दिल्ली से निकले थे, बारी-बारी से रिक्शा चलाकर दो दिन में यहां तक पहुंचे हैं। दुर्गेश ने बताया कि पीछे कई हजार लोग ऐसे हैं जो पैदल ही घरों के लिए निकल पड़े हैं। रास्ते में खाने-पीने को कुछ नहीं मिला। कई जगह उन्हें पुलिस के गुस्से का शिकार होना पड़ा। शरीर भी पूरी तरह से थक चुका है।
बड़ी संख्या में घर पहुंच रहे कामगार
पिहानी। क्षेत्र के ग्राम देहलिया, पंडरवा, कोटरा, जहानीखेड़ा, अब्दुल्लानगर व करीमनगर के सैकड़ों युवा पैदल या लिफ्ट लेकर घरों का लौट रहे हैं। ये सभी दिल्ली से बिना किसी मेडिकल जांच व सोशल डिस्टेंसिंग फार्मूला अपनाए घरों को पहुंच रहे हैं।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रभावित राज्यों से आने वाले लोगों की जांच कर उन्हें होम आइसोलेशन में रखने के निर्देश दिए गए हैं। बताया कि ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, एएनएम व आशा आदि के जरिये ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। शनिवार को दिल्ली से मोहल्ला छिपीटोला आए कामगारों की जांच के बाद उन्हें घर पर रहने को कहा गया। उनके घर के बाहर संबंधित व्यक्ति की डिटेल के साथ पर्ची भी चस्पा की गई है।