हरदोई। गांवों में गंदगी पसरी है और सफाईकर्मी ब्लॉक कार्यालय से लेकर विकास भवन तक अधिकारियों की सेवा में लगे हैं। एक दिल्ली में नेता तो एक लखनऊ में पूर्व सीडीओ के बंगले पर बेगार कर रहा है। कुछ सफाईकर्मियों ने दूसरों को काम पर लगा रखा है। कार्रवाई के नाम पर कमजोर सफाईकर्मियों पर गाज गिरा दी जाती है और पहुंच वालों की मौज है। प्रधान कुछ भी लिखकर दें होता वही है जो नेता और अधिकारी चाहते हैं।
गांवों की सफाई के लिए करीब 2202 सफाई कर्मियों की नियुक्ति की गई थी। इस समय करीब 1969 सफाई कर्मी ही कार्यरत हैं। ज्यादातर सफाईकर्मी काम करने गांवों में जाते ही नहीं है, कुछ ने अपनी जगह दूसरे को लगा रखा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सफाई कर्मी ब्लॉक मुख्यालय में बाबूगीरी में लगाए गए हैं। करीब एक दर्जन सफाईकर्मी डीपीआरओ कार्यालय मेें बाबूगीरी कर रहे हैं। एक सफाईकर्मी जिले के एक नेता के दिल्ली स्थित बंगले और एक लखनऊ में पूर्व सीडीओ के बंगले में काम कर रहा है। कुल 23 सफाई कर्मी जिले के बाहर काम कर रहे हैं लेकिन उनका वेतन जारी हो रहा है।
पिछले महीने जिले में आए डीपीआरओ ने कुछ सफाईकर्मियों पर कार्रवाई की लेकिन अपने कार्यालय में काम करने वाले सफाईकर्मियों को अभी तक उनकी तैनाती के गांवों में नहीं भेजा है। कार्रवाई के नाम पर सफाईकर्मियों पर गाज गिराई जा रही है। जिनकी पहुंच है उन्हें छुआ तक नहीं जाता है।
तत्कालीन डीपीआरओ भास्कर दत्त पांडेय ने सफाईकर्मियों पर शिकंजा कसा था लेकिन सत्ताधारी नेताओं के दबाव में वह बैकफुट पर आ गए थे। इसके बाद सफाईकर्मियों की मनमानी और बढ़ गई।
मनमाने गांवों में काम करना चाह रहे कर्मी
सफाई कर्मी अपने मनमाने गांवाें में ही काम करने के इच्छुक हैं। कर्मचारी शहर, नगर पंचायत और अपने निवास स्थान से सटे गांवों में ही तैनाती लेते हैं और यदि दूरस्थ गांवों में स्थानांतरण किया जाता है तो योगदान करने ही नहीं जाते हैं। ऐसे करीब चार मामले में 15 दिनों में सामने आ चुके हैं। हालांकि जिला पंचायत राज अधिकारी ने योगदान न करने पर सफाई कर्मियों को निलंबित कर दिया है।
सफाई कर्मियों को गांवों में नियमित काम करने के निर्देश हैं अगर कोई सफाई कर्मी रोज गांव नहीं जाता है तो उस पर कार्रवाई होगी। हमारे कार्यालय और ब्लाकों में लगे सफाईकर्मियों को भी उनकी तैनाती के गांवों में भेजा जाएगा। जिन गांवों में सफाईकर्मी नहीं है उनकी सूची भी बनाई जा रही है। - सभाजीत पांडेय, डीपीआरओ, हरदोई