शाहाबाद। मौसम बदलते ही नगर व ग्रामीण इलाकों में मलेरिया, टाइफाइड व वायरल बुखार तेजी के साथ पांव पसारता जा रहा है। हालात ये हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में रोजाना करीब 800 मरीज आ रहे हैं।
इसमें से करीब 500 मरीज बुखार पीड़ित होते हैं। बुखार से तीन दिन में दो लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। सीबीसी मशीन दो साल से बंद है।
केमिकल नहीं होने के चलते जांचें नहीं हो रही हैं। गांव कुतुबनगर निवासी रवी चंद्र की 14 वर्षीय पुत्री को पांच दिन से जाड़ा देकर बुखार आ रहा था। गांव के झोलाछाप उसका इलाज करते रहे।
रविवार रात उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। गांव सिकंदरपुर नरकतरा निवासी कमल की पत्नी वैजयंती (35) तेज बुखार की चपेट में आई थीं।
बुखार से निजात न मिलने पर तीन दिन पहले महिला को सरकारी अस्पताल लाया गया, लेकिन उसे भी बचाया नहीं जा सका। अस्पताल आने वाला हर दूसरा व्यक्ति बुखार से पीड़ित है। इस वजह से ज्यादातर बुखार से पीड़ित मरीजों को बिना रक्त की जांच कराए दवा देकर इलाज किया जा रहा है।
वर्जन
गांवों में बुखार पीड़ित मरीजों में मलेरिया की जांच के लिए आशा व एएनएम को किट उपलब्ध करा दी गई हैं। अस्पताल में दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। बुखार आने पर अस्पताल में आकर लोग इलाज कराएं। अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें। कूलर, गमलों आदि में पानी का जमाव न होने दें। - एमपी जायसवाल, चिकित्साधीक्षक