पिहानी। कस्बे का रौजा सदर जहां और उससे सटे तालाब के अच्छे दिन आने वाले हैं। सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और लखनऊ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की टीमों ने रौजा परिसर पहुंच कर ऐतिहासिक इमारत, परिसर व तालाब की स्थिति का जायजा लिया। मंगलवार से छात्र-छात्राओं की टीम सर्वे शुरू करेगी। इसकी रिपोर्ट पांच अगस्त तक केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
टीम के साथ आए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ड्राट्स मैन राकेश कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग अर्बन अफेयर्स (महुआ) ने मई-जून 2022 में पूरे देश के 200 स्मारक सर्वे के लिए चुने हैं।
इनमें पिहानी की ऐतिहासिक इमारत रौजा सदर जहां (हुमायूं के मंत्री रहे नवाब सदर जहां और उनके भाई की कब्र) और इससे सटा हुआ पक्का तालाब भी शामिल है।
रौजा और तालाब का ऐतिहासिक बैकग्राउंड है, इसका संरक्षण जरूरी है। परिसर में ही पश्चिमी दिशा में स्थित दूसरे रौजे की मरम्मत भी माह भर के अंदर शुरू होगी।
रौजा गेट की पूर्वी दिशा में बाउंड्री टूटने से पशुओं को अंदर आने का रास्ता मिल रहा, उसे बंद कराया जाएगा। इसके साथ ही निजाम मुर्तजा खां का रौजा भी संरक्षित किया जाएगा।
लखनऊ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रधानाचार्य विपिन जायसवाल ने बताया कि उनके छात्र-छात्राओं की टीम मंगलवार से सर्वे शुरू करेगी। इस सर्वे में पानी कहां से आ रहा है, किधर जा रहा है, गंदगी होने का मुख्य कारण क्या है आदि बिंदुओं का पता लगाया जाएगा।
इसके लिए आधुनिक मशीनें आएंगी, जो पानी की गुणवत्ता परखेंगी। इस दौरान पुरातत्व विभाग के रामबृक्ष यादव व अशोक कुमार मीना, हफीज मंसूरी आदि मौजूद रहे।
पालिका की कार्यशैली पर टीम नाराज
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ड्राट्स मैन राकेश कुमार ने तालाब की सफाई और जीर्णोद्धार के लिए पालिका द्वारा रौजे की तरफ से खोदी गई खाई पर नाराजगी जताई। कहा कि यह रौजा इमारत की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
इससे रौजा इमारत को खतरा पहुंचा है। पालिका की ओर से तालाब के संरक्षण व सुंदरीकरण के लिए मांगी गई एनओसी सिर्फ तीन किनारों के लिए दी गई थी, जबकि रौजा वाली साइड पुरातत्व विभाग खुद दुरुस्त कराएगा।
पालिका ने रौजा और तालाब के पास सामुदायिक शौचालय बना कर भी अपने अधिकारों की हदें पार की हैं। शौचालय, घरों का गंदा पानी व स्लाटर हाउस की गंदगी भी तालाब में आने से टीम पालिका की कार्यशैली पर नाराज दिखी। उन्होंने कहा कि शौचालय के पास वाली पुलिया साफ कराई जानी चाहिए।
रौजा सदर जहां का इतिहास
रौजा सदर जहां हुमायूं काल की स्मृतियों को संजोए है। 1540 ई में शेरशाह और हुमायूं के बीच हुई जंग में हुमायूं के वरिष्ठ मंत्री सदर ए जहां ने यहां आकर पनाह ली थी। दोबारा हुकूमत मिलने के बाद हुमायूं ने यहां उन्हें जागीर दी।
सदरे जहां ने यहां बस्ती आबाद की और पिन्हानी अर्थात छुपने की जगह नाम रखा, जो अब पिहानी हो गया है। कहा जाता है कि तब यूरोपियन पर्यटक यहां घूमने आते थे। उन्होंने इस कस्बे को दमिश्क ए अवध की संज्ञा दी थी।