हरदोई। गांधी भवन सभागार में सोमवार को 37वीं जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में प्रेमावती ने शपथ ली तो लोगों ने तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया। इसके बाद 71 जिला पंचायत सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।
जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती को एवं प्रेमावती ने सभी 71 सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम की शुरुआत भाजपा नेता नरेश अग्रवाल, जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। संचालन मनीष मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में राज्य सभा सदस्य डॉ. अशोक वाजपेयी, भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू, विधायक रजनी तिवारी, सदर विधायक रजनी तिवारी, विधायक श्याम प्रकाश, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, भाजपा नेता पीके वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत स्वाती जैन आदि मौजूद रहे।
प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा चुनाव में भी लहरेगा भाजपा का परचम: नरेश
समारोह में वरिष्ठ भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि पंचायत चुनाव में जिले की सबसे बड़ी पंचायत पर भाजपा ने जीत दर्ज कराई है। छह माह बाद प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा चुनाव में भी भाजपा परचम लहराएगी। उन्होंने पंचायत सदस्यों, ब्लाक प्रमुखों से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक ले जाने को कहा। कहा कि यदि केंद्र व राज्य की योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति को मिलेगा तो देश फिर से सोने की चिड़िया बन जाएगा। सवायजपुर विधायक माधवेंद्र सिंह रानू ने कहा कि शिक्षक समाज का निर्माता होता है। प्रेमावती शिक्षक रह चुकीं हैं निश्चित तौर पर जिला पंचायत के कार्य सराहनीय होंगे।
डीएम बोले, मास्क नहीं लगाए हैं तो बाहर जाएं
शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान गांधी भवन सभागार में गेट पर बिना मास्क खड़े लोगों की भीड़ देख डीएम अविनाश कुमार खफा हो गए। मंच पर पहुंचते ही माइक थाम लिया और बोले जो भी मास्क न लगाए हों वे बाहर चले जाएं। यहां बिल्कुल न रुकें। जिसके बाद वहां मौजूद कइयों ने जेब से निकाल मास्क लगा लिया।
पीके हैं पर पीते नहीं कह कर ली चुटकी
मंच पर अपना संबोधन शुरू करने से पहले वरिष्ठ भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने पीके नाम आते ही चुटकी ली और कहा कि नाम जरूर पीके है पर ये पीते नहीं हैं। इतना सुनकर सभागार में मौजूद लोग ठहाके मारकर हंसने लगे।
पंचायत व्यवस्था में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सबसे बड़ा
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सबसे बड़ा है। जिला पंचायत अध्यक्ष की सहमति के बाद ही कोई प्रस्ताव पारित होता है। जिला पंचायत अध्यक्ष और राज्य सरकार के मद से प्रतिवर्ष करीब 50 से 52 करोड़ रुपये का बजट मिलता है।