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बीस दिनों में हुई सिर्फ 1337 एमटी गेहूं खरीद

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फोटो-33- सेंटर का निरीक्षण करते डिप्टी आरएमओ अनुराग पाण्डेय । - फोटो : HARDOI
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हरदोई। सरकारी गेहूं खरीद फिलहाल पटरी से उतरी हुई है। समर्थन मूल्य एवं बाजार का भाव का औसत लगभग बराबर है। जबकि खरीद के आंकड़ों में जमीन आसमान का अंतर है। मंडी में प्रतिदिन गेहूं की बिक्री का औसत 15 सौ एमटी के आसपास है। जबकि सेंटरों पर बीस दिनों में महज 1337 एमटी गेहूं की खरीद हुई है।
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सवायजपुर क्षेत्र के किसान रामकुमार, कल्लू, उमेश, बट्टू ने बताया कि समर्थन मूल्य एवं बाजार भाव में कोई खास अंतर नहीं है। ऐेसे में यदि किसानों को गांव में ही गेहूं बेचने का अवसर मिलता हैं, तो वो मंडी तक 40 से 60 रुपये क्विंटल का भाड़ा लगाकर और दो जगह करीब 20 रुपये क्विंटल की पल्लेदारी एवं अन्य खर्च क्यों उठाएं। इसके अलावा मंडी आने जाने में पूरा दिन लग जाता है। इधर व्यापारी नकद भुगतान के साथ ही किसानों को सम्मान भी देता है।
इधर जिले में सरकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य 1 लाख 81 हजार एमटी रखा गया है। जिसके सापेक्ष अभी तक महज 1233 एमटी के आसपास खरीद हुई है। गेहूूं खरीद के लिए करीब 122 खरीद केंद्र बनाए गए थे।
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समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि मंडी में गेहूं का भाव 2 हजार से 2050 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। भाड़ा आदि खर्च से बचने के लिए छोटे किसान गांव में ही 1950 रुपये के भाव पर गेहूं बेंच रहे है।
सवायजपुर क्षेत्र के पंचनद कटरी के करीब एक सौ गांवों के बीच खरीद सेंटर तक पहुंचने के लिए कम से कम 30 से 50 किलोमीटर की दूरी तय करने का औसत है। इसके बाद भी पिछले वर्षों में जो व्यवहार एवं सुविधा शुल्क मांगने के आरोप लगे है। इस कारण भी किसान क्रय केंद्रों से मुंह मोड़ रहे हैं।
एक फोन काल पर पंजीयन और खेतों पर तौल का विचार
गेहूं खरीद को पटरी पर लाने के लिए खरीद एजेंसियां गांवों में डेरा डालकर मौके पर ही पंजीयन कर तौल करने पर विचार कर रही है। शासन से इसके लिए ट्रांसपोर्ट भाड़ा आदि देने की स्वीकृति मिल गई तो एक फोन काल पर खेत से गेहूं की तौल हो जाएगी।
वर्जन
यह सही है कि इस साल अपेक्षानुसार किसान सेंटरों पर नहीं आ रहे हैं। इसके पीछे बाजार का भाव बढ़ा होना अहम कारण है। कुछ क्षेत्रों में खरीद एजेंसियों ने गांवों से ज्यादा मंडी क्षेत्रों में सेंटर खोलने को तरजीह दी।
यह भी एक कारण किसानों की कम आमद का हो सकता है। गांव गांव खेतों से तौल एवं पंजीयन के लिए शासन से ट्रांसपोर्ट आदि की स्वीकृति मिलने पर व्यवस्था हो सकती है। फिलहाल खरीद एजेंसियां इस दिशा में विचार कर रही हैं। शासन के निर्देशानुसार किसानों से संपर्क किया जा रहा है। - अनुराग पांडेय, डिप्टी आरएमओ
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