क्वारंटीन सेंटर से परिवार सहित घर जाता श्रमिक।
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सवायजपुर। रोजगार के लिए राजस्थान, दिल्ली व अन्य प्रांतों में गए श्रमिक लॉकडाउन के चलते वहीं फंस गए थे। पिछले कुछ दिनों से प्रवासी श्रमिकों के ट्रेनों, बसों व अन्य वाहनों घर वापस लौटने का सिलसिला जारी है। तहसील के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक तहसील क्षेत्र में 5 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक आ चुके हैं। श्रमिकों का आना जारी है। गुरुवार को भी 110 प्रवासी श्रमिक अपने परिवार के साथ बसों से महाराजा हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज में बनाए क्वारंटीन सेंटर पहुंचे। यहां सभी की जांच की गई, जांच में स्वास्थ्य दुरुस्त मिलने पर श्रमिकों को घर भेज दिया गया। नोडल अधिकारी व बीईओ सोमनाथ विश्वकर्मा ने बताया कि सभी को राशन किट उपलब्ध कराई गई हैं। गुरुवार को वापस आए भरखनी ब्लॉक के कहरई नकटौरा गांव निवासी सतीश ने बताया कि वह, उनके परिवार की महिलाएं एवं सत्यवीर, विमलेश व अमन सहित कुल 6 लोग लुधियाना से एक प्राइवेट बस से किराया देकर लौटे हैं।
बताया कि वह सभी लुधियाना में एक धागा बनाने वाली फैक्टरी में काम करते थे। सतीश ने बताया कि उन्होंने वापसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन जब वापस आना था तभी तबियत खराब हो गई। वहां की पुलिस ने उन्हें 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया। क्वारंटीन सेंटर से छूटने के बाद वापस आए हैं। बताया कि यह अनुभव जीवन के सारे अनुभव में सबसे खराब है। अब कितनी भी परेशानी हो, नमक रोटी खाएंगे, लेकिन बाहर नहीं जाएंगे। सांडी ब्लॉक के एक गांव निवासी शिवचरण, अपनी बहू छुटक्की व भाभी गीता देवी के साथ राजस्थान से लौटे हैं। बताया कि वह सभी चूड़ी फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण वहीं फंस गए थे। पिछले दो माह किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं। हालात ने सिखा दिया है कि अपने घर सबसे बेहतर है। यहीं कोई छोटा मोटा काम करेंगे। बताया कि जिस मकान में रहते थे, उसके मकान मालिक ने बिना किराए के घर आने से रोक दिया। मजबूरन घर से रुपये मंगवाए, तब कहीं जाकर बस से वापस आए हैं। बताया कि सरकार द्वारा उन्हें बस से लाया गया है, वापसी का कोई किराया नहीं पड़ा। कुछ ऐस ही कहानियां बाहर से लौटने वाला हर श्रमिक सुना रहा है, कुल मिलाकर श्रमिकों का साफ कहना है कि रोजगार के बाहर जाने हर हाल में परहेज करेंगे। जीवन यापन के लिए यहीं कुछ कर लेंगे।