हरदोई। जिला महिला अस्पताल अव्यवस्थाओं के रोग से खुद बीमार है। यहां कई माह से लिफ्ट बंद पड़ी है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को ऊपर वार्ड तक पहुंचने में परेशानी होती है। मरीजों को सीढ़ियां चढ़कर ही ऊपर वार्डों तक पहुंचना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती, प्रसूता व दिव्यांग मरीजों को हो रही है।
जिला महिला अस्पताल तीन मंजिल बना है। यहां पर कहने के लिए तो सारी आधुनिक सुविधाएं हैं, लेकिन अव्यवस्था के चलते मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यहां पर प्रसूताओं को प्रसव कक्ष, पैथोलॉजी और वार्डों तक पहुंचाने के लिए लिफ्ट तो लगी है, लेकिन वह कई माह से बंद पड़ी है। नतीजतन तीमारदार प्रसूता और गर्भवती को स्ट्रेचर से रैंप या कंधों के सहारे सीढ़ी चढ़ाकर ले जाने पर मजबूर हैं।
इसके अलावा ओपीडी में सैंपल कलेक्शन कक्ष में एसी खराब पड़ा है। इसके अलावा अन्य एसी भी मरम्मत के अभाव में बंद पड़े हैं। अस्पताल प्रशासन इससे अंजान बना हुआ है। इसका खामियाजा प्रसूता व उनके तीमारदार भुगतने के लिए मजबूर हैं।
मंत्री जी आए तो चली लिफ्ट, फिर हो गई बंद
कुछ दिन पहले मंत्री सुरेश खन्ना ने महिला अस्पताल व जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। मंत्री के निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने महिला अस्पताल की लिफ्ट चालू करा दी थी। दूसरे दिन लिफ्ट बंद हो गई।
सीएमएस ने लिफ्ट की मेंटीनेंस मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी बताई है। उनके मुताबिक मेंटीनेंस की मद का बकाया न चुकाने पर लिफ्ट बंद है। अब भुगतान कब होगा, लिफ्ट कब चलेगी, यह किसी को नहीं पता।
तीमारदारों ने बयां की हकीकत
देहात कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कौढ़ा निवासी अनूप सिंह ने बताया कि उसके रिश्तेदार भर्ती हैं। शनिवार को परिवार के साथ देखने आए थे। रिश्तेदार दूसरी मंजिल पर भर्ती हैं। लिफ्ट बंद होने की वजह से सीढ़ी (जीना) से चढ़कर गए।
इसके बाद रैंप से उतरकर आए तो दम फूल गया। इस तरह चांद बेहटा निवासी रामलड़ैती ने बताया कि उसकी बहू ने बच्चे को जन्म दिया था। दूसरी मंजिल पर भर्ती है।
शनिवार को वह नवजात को गोद में लेकर रैंप से उतरकर टीके लगवाने नीचे आईं, उसी रास्ते से फिर चढ़कर र्गइं। उनका कहना है कि लिफ्ट खराब होने के चलते वह दो दिनों से रैंप से उतर कर ऊपर-नीचे आना-जाना कर रही हैं।
वर्जन
लिफ्ट के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की है। जहां तक मेरी जानकारी है मेंटीनेंस के पिछले बकाये का भुगतान कंपनी को नहीं किया गया है। इसलिए कंपनी ने मेटीनेंस कराना बंद कर दिया। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को लिखित तौर से अवगत कराया गया था। जैसे ही कंपनी का भुगतान हो जाएगा, लिफ्ट की रिपेयरिंग होकर चालू हो जाएगी। - डॉ. विनीता चतुर्वेदी, सीएमएस, महिला अस्पताल
फोटो-05- महिला चिकित्सालय में स्लोव से जाते तीमारदार- फोटो : HARDOI
फोटो-02- जिला महिला चिकित्सालय में बंद पड़ी लिफ्ट- फोटो : HARDOI
फोटो-03- ओपीडी कच्छ में बंद पड़ी एसी- फोटो : HARDOI