कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते रायबरेली से आए नीरज पांडेय। संवाद
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हरदोई। रसखान प्रेक्षागृह में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम के तहत देर शाम आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। नीरज पांडेय की रचना मरकर भी महापुरुष पीढ़ियों के लिए, अपना अमर इतिहास छोड़ जाते हैं... काफी सराही गई।
कवि सम्मेलन की शुरुआत मिश्रिख से आये गीतकार जगजीवन मिश्र की वाणी वंदना से हुई। लखनऊ से आये ओज के कवि अतुल ने परतंत्रता के बंध काटने को था अधीर, क्रांतिपथ गामियों के पथ का प्रकाश था। जो क्रांतिदूत, क्रांतिपुंज मेरा वो सुभाष था... कविता पढ़ तालियां बटोरीं। सीतापुर से आई कवयित्री सोनी मिश्रा ने लड़े निज देश के खातिर उन्हें हम सर झुकाते हैं, दिया बलिदान जिस जिसने उन्हीं के गीत गाते हैं... प्रस्तुत की। कवि पवन कश्यप ने मैं गाऊंगा गीत अनूठे तुम केवल बैठी रहना... से समा बांधा। बाराबंकी से आये हास्य कवि विकास बौखल ने राजनीति पर तंज कसा, कुछ और कहो इनका नेता न कहो, नेता कहे देश का अपमान बहुत है। संयोजक अजीत शुक्ल ने देश नमन करता है शतशत भारत वीर सुभाष को... कविता पढ़ सुभाष जी को शब्द पुष्प अर्पित किये। कवि अजीत तोमर ने दुश्मन के फटे वक्ष का होना चश्मदीद है, मुझे तो मुल्क हिंदुस्तान पर होना शहीद है... पढ़कर सभी को सोचने पर विवश कर दिया। जगजीवन मिश्र की सिरका शीर्षक रचना सराही गयी। संचालन नीरज पांडेय ने किया। कवि सम्मेलन से पूर्व एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में जिले के शहीदों की पत्नियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष सुखसागर मिश्र मधुर ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में शाहजहांपुर से आई निर्देशक मालिक आनंद और वैज्ञानिक गोपाल राजू सम्मिलित रहे। मुख्य आयोजक अवरेन्द्र अवस्थी, अनुज सिंह, विशाल सक्सेना, कृष्णा आदि रहे।