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Hardoi News: कृषि महाविद्यालय में जमीन का रोड़ा, सीएसए का संबद्धता देने से इनकार

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हरदोई। राजकीय कृषि महाविद्यालय में जमीन का रोड़ा फंस गया है। महाविद्यालय के संचालन के लिए 30 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, मगर तीन साल बाद भी नहीं मिल सकी है। इस वजह से कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय संबद्धता देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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जुलाई में विश्वविद्यालय से आई निरीक्षण टीम ने रिपोर्ट भेज दी है। 11 करोड़ की लागत से नवनिर्मित भवन की दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगा है। भवन की देखरेख के नाम पर साल भर में 3.60 लाख खर्च हो रहे हैं।वर्ष 2015 में राजकीय कृषि महाविद्यालय के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। आवास विकास परिषद ने भवन का निर्माण कार्य कराया।
वर्ष 2019 में ऑनलाइन भवन का लखनऊ से लोकार्पण हुआ। इसके बाद कृषि में दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों में उम्मीद जगी थी कि अब वे यहीं से कृषि स्नातक और परास्नातक कर लेंगे। अब सीएसए ने महाविद्यालय को संबद्धता देने से पहले 30 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता जाहिर की है। कॉलेज से सटी कृषि फार्म की अब करीब आठ हेक्टेयर ही भूमि उपलब्ध है। संबद्धता के मानकों की जांच करने के लिए विश्वविद्यालय की टीम बीते माह आई थी।
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जमीन नहीं मुहैया होने के चलते विश्वविद्यालय ने संबद्धता देने से इन्कार कर दिया है। इस समय कृषि महाविद्यालय राजकीय डिग्री कॉलेज की निगरानी में है। यहां प्राचार्य इसकी देखरेख कर रहे हैं।
दीवारों का प्लास्टर तक उखड़ने लगा
राजकीय कृषि महाविद्यालय में 480 छात्रों के शिक्षण की व्यवस्था है। यहां 11 करोड़ की लागत से निर्मित महाविद्यालय में छात्रों के रहने के लिए हास्टल भी बनवाए गए हैं। तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद महाविद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो पाने के चलते दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगा है। भवन की रखवाली के लिए तीन गार्ड रखे गए हैं। इनकी आठ-आठ घंटे ड्यूटी है। तीनों पर प्रतिमाह करीब 12 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
सीएसए की टीम जुलाई में निरीक्षण करने आई थी, लेकिन जमीन के मानक पूरे नहीं हैं। मानक पूरे होने पर ही सीएसए ने संबद्धता लेने की रिपोर्ट दी है। जिसे प्रशासन को भेज दिया गया है।
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- प्रो. नेत्रपाल सिंह, प्राचार्य, राजकीय डिग्री कॉलेज
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