हरदोई। मनरेगा के तहत चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही बीत चुकी है। अधिकारी हैं कि अधिक से अधिक परिवारों को सौ दिन का रोजगार दिलाने में अभी भी ढिलाही बरत रहे हैं। क्योंकि जिले के 19 में से 15 ब्लाकों के 84 गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक एक भी दिन मनरेगा के तहत एक भी श्रमिक ने फावड़ा नहीं चलाया है।
कोरोना संक्रमण के बाद बिगड़े हालातों में ग्रामीण इलाकों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा सबसे महत्वपूर्ण योजना मानी जाती रही है। परदेस से लौटे श्रमिकों के साथ ही गांव में रह रहे लोगों का पलायन रोकने के लिए भी मनरेगा के तहत जॉबकार्ड धारकों को अधिक से अधिक कार्य उपलब्ध कराने के निर्देश ग्राम्य विकास विभाग क उच्चाधिकारी लगातार देते रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में जनपद के 78 हजार से अधिक परिवारों को सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी है। इसके बाद भी जनपद में मनरेगा की निगरानी करने वाले अधिकारी और कर्मचारी लगातार लापरवाही कर रहे हैं।
बीती दो जुलाई को हुई गोपनीय समीक्षा में पता चला कि जनपद में 19 विकास खंडों में से 15 विकास खंडों के 84 गांव ऐसे हैं जहां मनरेगा के तहत चालू वित्तीय वर्ष के 90 दिन बीतने के बाद भी एक भी श्रमिक को एक भी दिन काम नहीं मिल पाया।
किस विकास खंड की कितनी ग्राम पंचायतों में नहीं हुआ कार्य
ब्लाक का नाम ग्राम पंचायतों की संख्या
अहिरोरी 05
बावन 08
भरावन 03
भरखनी 08
बिलग्राम 12
हरियावां 04
हरपालपुर 03
कछौना 01
माधौगंज 03
मल्लावां 02
सांडी 18
संडीला 03
शाहाबाद 02
सुरसा 05
टड़ियावां 06
सीडीओ नाराज, ग्राम सचिवों और तकनीकी सहायकों का वेतन रोका
मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना ने 84 ग्राम पंचायतों में एक भी दिन मनरेगा से कार्य न होने को गंभीरता से लिया है। सभी 15 विकास खंडों के खंड विकास अधिकारियों, संबंधित ग्राम सचिवों और तकनीकी सहायकों का जून का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया है। तीन दिन में संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर विभागीय कार्रवाई और निलंबन की चेतावनी भी सीडीओ ने दी है।