मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना में वर्ष 09-10
एवं 10-11 के मध्य खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से उद्योगों के नाम पर ऋण
लेना और उस राशि को उद्योग में न लगाकर कहीं और लगाना आधा दर्जन से अधिक
लोगों को उस समय भारी पड़ा जब जांच कराने के बाद जिला खादी ग्रामोद्योग ने
इन उद्योगों को न सिर्फ बंद कराने के निर्देश देते हुए बैंकों को भी इनसे
ऋण वसूली करने को पत्र जारी कर दिया।
विभाग की इस कार्रवाई से अन्य
उद्योग संचालित करने वालों में खलबली मच गई है। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग
रोजगार योजना के माध्यम से खादी ग्रामोद्योग बैंकों के माध्यम से
बेरोजगारों को स्वरोजगार स्थापित कराने के लिए ऋण मुहैया कराता है। यह ऋण
उसी उद्योग में लगाना होता है।
जिसको लेकर आवेदक द्वारा बैंक से मांग की
जाती है, पर पुराने वर्षों में कुछ ऐसा ही हुआ कि लोन लेने के बाद उस राशि
को किसी और उद्योग में लगा दिया गया या फिर अपने निजी क ार्यों में लगाकर
उद्योग संचालित ही नहीं किया गया। कुछ ऐसे ही तथ्य अभी कुछ माह पूर्व ही
जिले में तैनात होकर आए खादी ग्रामोद्योग अधिकारी कमलेश कुमार के समक्ष भी
आए। जिसके बाद उन्होंने जांच के निर्देश दे दिए।
वर्ष 09-10 एवं वर्ष
10-11 के वर्षों के ऐसे उद्योगों की जांच कराने के बाद आधा दर्जन ऐसे लोग
मिले जिन्होंने नियमों का उल्लंघन करके लोन की राशि को कहीं और लगा दिया।
जिसके बाद उन्होंने न सिर्फ कागजों से भी इन उद्योगों को बंद कराने के
निर्देश दे दिए, बल्कि उनको तत्काल रूप से ब्याज उपादान की जो राशि दी जाती
थी, उसको बंद क रा दिया।
इसके साथ बैंकों को पत्र जारी कर इनसे ऋण वसूली
करने को कहा है। कार्रवाई के बाद उन्होंने बताया कि इन दोनों वर्षों की
लंबित मामलों ने उन्होंने निपटा दिया है। अब आगे के वर्षों के ऋण आवंटन के
बाबत भी जांचें कराई जाएंगी। कहा कि जिन्होंने काम नहीं किया और सब्सिडी ली
है, उनको ब्याज उपादान का लाभ नहीं दिया जाएगा और बिल की वसूली की जाएगी।
उधर,
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी कमलेश कुमार का कहना है कि कुछ ऐसे मामले
भी हो सकते हैं, जो दूर दराज क्षेत्रों में हैं। उनके द्वारा तो ऐसे
उद्योगों जो सुचारु रूप से नहीं चल पा रहे, उनकी जांच कराई जाएगी और लखनऊ
हेडक्वार्टर भी जानकारी दी जाएगी। कहा कि वहां से भी जांच कराकर कार्रवाई
की जा सकती है।