हरदोई। सावन मास उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में बुधवार से शुरू हो रहा है। मंदिरों की साफ-सफाई शुरू हो गई है। भक्त शिवालय को सजाने में लगे हैं। शिव की आराधना के लिए मंदिरों में बम बम भोले के स्वर गूंजने लगे हैं। उमाकांत अवस्थी ने बताया कि गुरु चंडाल योग में सावन शुरू हो रहा है। जिनकी कुंडली में राहु या केतु की दशा चल रही हो, वह जीवित मछली को बहते हुए पानी में सावन भर डालें। ऐसा करने पर शिव की कृपा होगी।
शास्त्रों की माने तो भगवान शिव की प्रसन्नता के बाद श्रद्धालुओं पर शनि देव की कृपा भी बरसती है। इसलिए श्रद्धालु शिव को प्रसन्न कर कुंडली में शनि दोष को दूर कर सकते हैं। पौराणिक प्रसंगों की माने तो शनि देव ने शिव भक्ति से नवग्रहों में ऊंचा स्थान पाया है। मान्यता है कि शनि, महादेव के आदेश का पालन कर प्राणियों को उनके कर्मों के मुताबिक दंड देते हैं।
उमाकांत अवस्थी का कहना है कि शिव उपासना के कुछ आसान उपायों से भक्त अपनी कुंडली में लगे शनि दोष से परेशानियों से राहत पा सकता है। शनि या सोमवार को शिव षड़ाक्षरी मंत्र ऊं नम शिवाय बोलते हुए शिव को जल से अभिषेक कर गंध, अक्षत, फूल चढ़ाएं। साथ में काले तिल भी अर्पित करें। इसके बाद सफेद मिठाई का भोग लगाकर आरती कर शनि दशा से मुक्ति पाएं। इसके अलावा दूसरी युक्ति में शिव की पूजा में कोई भी शिव मंत्र या स्तुति बोलकर 108 आंकड़े के फूल हर रोज अर्पित करने से भी कृपा प्राप्त होगी।
सावन माह बरसती शिव की कृपा
सुनील शास्त्री कहते हैं कि सावन में हर हाथ भगवान शिव की आराधना को उठ जाता है। इसी तरह भगवान शिव भी आशीर्वाद देने के लिए अपने हाथों को खुला रखते हैं। उनकी कृपा पाने के लिए श्रद्धालुओं के पास इससे अच्छा मौका नहीं है। इसलिए भक्त विधि विधान से शिव का पूजन कर अपने कष्टों का निवारण कर सकता है।