नक्षत्रों का राजा पुष्य है। ये समृद्धि देने वाला और संपत्ति व आय में बढ़ोत्तरी करता है। पुष्य नक्षत्र के संयोग से कार्यसिद्धि योग भी बनता है।
दिवाली से सात दिन पहले सात नवंबर को पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। जिले में इसको लेकर खासकर व्यापार जगत में तैयारियां शुरू हो गईं हैं।
शास्त्रों के जानकार उमाकांत अवस्थी ने बताया कि नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र पुष्य जैसे सभी नक्षत्रों में सबसे उत्तम और अति शुभ माना जाता है।
आचार्य सनत शास्त्री ने बताया कि नया सामान आभूषणों की खरीदारी इस दिन श्रेष्ठ मानी जाती है। सोना और चांदी खरीदने से लाभ होता है, इस दिन खरीदी गई वस्तु स्थायी रूप से लंबे समय तक बनी रहती है।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कारोबार व कॅरियर की शुरुआत के लिए भी है पुष्य नक्षत्र अति उत्तम माना जाता है। इसके शुभ योग में राशि के अनुसार खरीदारी करना शुभ होता है।
इस योग में ऑटोमोबाइल की भी खरीदारी की जा सकती है। इस दिन अगर आप अपनी राशि के अनुसार वस्तु खरीदेंगे तो वह अधिक फलदाई और स्थायी रहेगी।
आचार्य सनत मिश्रा ने बताया कि स्वर्ण एक शुद्ध पवित्र और अक्षय धातु है जो समाप्त नहीं होती है। अत: सोने एवं चांदी को इस पुष्य नक्षत्र में विशेष रुप से जाता है, जिससे कि स्थायी समृद्धि मिले।
पं. सुनील शास्त्री का कहना है कि पुष्य नक्षत्र में नये मकान की खरीदारी करना अथवा नए मकान में गृह प्रवेश के लिए पुष्य नक्षत्र का दिन बहुत ही शुभ होता है। ये दिन रियल स्टेट से जुड़े कारोबारियों के लिए खास होता है। नए फर्नीचर जैसे कि टेबल, कुर्सी, अलमारी इत्यादि की खरीदारी भी इस शुभ दिन पर की जा सकती है।