संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। आज से पितृ पक्ष शुरू हो गए हैं। पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः, पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वाः प्रीयंति देवता में पितृों के महत्व का सार निहित है। पितृों को तर्पण देने से देवगण भी प्रसन्न होते हैं। श्रद्धा से किए जलदान, भोज से देवलोक में निवास करने वाले पितृों को मोक्ष मिलता है और वह धन-धान्य आदि का आशीर्वाद देते हैं।
पितृों के निमित्त पखवाड़ा आज से शुरू हो गया है। देवता, ऋषियों और पितृों के तर्पण का महत्व बताया गया है। इस पखवाड़ा में जो पारिवारिक आत्माएं देवलोक में निवास करती हैं और मोक्ष नहीं मिलता है उनके मोक्ष के लिए जलदान, ब्राह्मण भोज और गया जाने का विधान बताया गया है।
आचार्य उमाकांत शास्त्री ने बताया कि परिवार के सदस्यों की ओर से जलदान, ब्राह्माण भोज कराए जाने से देवलोक में आत्माएं प्रसन्न होती है, देवगण प्रसन्न होते हैं। बताया कि जलदान पुरुष को ही करना चाहिए। इससे पितर आशीर्वाद देते हैं, भाग्यवृद्धि, वंशवृृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। पितर दोष समाप्त होता है। कुंडली में पितृ दोष होने पर पूजन का विधान बताया गया है।
आचार्य सनत कुमार मिश्रा ने बताया कि इस पखवाड़ा को महालया भी कहा गया है। पितृों की निमित्त, तृप्ति के लिए नियमित जलदान करना चाहिए। भोजनदान श्रद्धानुसार व्यक्ति कराते हैं। पितृों के प्रसन्न होने से गोधन, धन, धान्य और वंशवृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बताया कि सनातन धर्म, संस्कृति में ही सभी को खिलाने की क्षमता है। दोनों आचार्यों ने बताया कि जलदान के समय व्यक्ति को हाथ में कुशा जरूर धारण करनी चाहिए।
इस प्रकार से करें जलदान
आचार्यगणों ने बताया कि सुबह स्नान के बाद एक लोटे में साफ जल, इसमें सफेद फूल और काले तिल डालें। हाथ में कुशा धारण कर भगवान सूर्य के सम्मुख खड़े होकर अपने पितृों का ध्यान कर जलदान करें।