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लक्ष्मी की वृद्धि होने पर सत्कार्य में लगाएं

Fri, 15 Apr 2016 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
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आचार्य संतोष भाई - फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। धन की तीन गति होती है। भोग करें, दान करें या फिर धन स्वत: नष्ट हो जाता है। लक्ष्मी की वृद्धि हो तो उसे सत्कार्य में लगाना चाहिए। श्री राम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन आचार्य संतोष भाई ने श्रद्धालुओं से ये बातें कही।
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आचार्य ने कहा कि प्रभु से संबंध बनाने के लिए प्रभु के साथ भाव से प्रणय करना पड़ता है। उनके साथ नित्य भाव की जागृति से प्रभु हृदय में वास करते हैं। समाज के दीन दुखी निराश्रित प्राणियों की सेवा बिना अभिमान के करने से प्रभु की कृपा बरसती है। व्यक्ति संसार में प्रेम और प्रभु से व्यवहार करता है।

कहा कि भक्ति का आश्रय लेने से जगत का मोह मुक्त हो जाता है। भक्त सदैव शांत रहते हैं। उनको क्रोध नहीं आता। क्रोध अभिमानी की पहचान है। अभिमान से व्यक्ति का पतन होता है। दान करने वाले व्यक्ति भी सावधानी रखें। राजा मृग ने दान की वस्तु को पुन: दान कर दिया तो उन्हें गिरगिट बनना पड़ा। भगवान द्वारिकाधीश ने विश्वबंधुता का संदेश सुदामा से मित्रता निभा कर दिया।
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सखा शब्द का महत्व बताते हुए आचार्य संतोष भाई ने कहा कि सखा वही है जो साथ में खाए खेले और दुख सुख में साथ निभाए। आचार्य ने सबको संगठित होकर सेवा कार्य के लिए प्रेरित किया। कहा कि मतभेद हो सकता है लेकिन मन में भेद नहीं होना चाहिए। समापन अवसर पर श्रीमद्भागवत पोथी की आरती राकेश अग्रवाल व संजीव अग्रवाल ने उतारी।

इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन नगर पालिका उमेश अग्रवाल, पीके वर्मा, राजीव मोहन अवस्थी, बाल शास्त्री, हरिवंश सिंह, प्रयागनंद, प्रतिभा कटियार, कंचन पांडे, राजेंद्र पटेल, गिरीश डिडवानिया, अपूर्व महेश्वरी, दिलीप, विपिन गुप्ता, रत्नेश गुप्ता, दिलीप गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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