हरदोई। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और बच्चों के बुनियादी पठन-पाठन की क्षमता को निखारने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को हर महीने अपने स्कूल के विद्यार्थियों की निपुण क्षमता की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
बैठक में संबंधित विकास खंड के सभी प्रधानाध्यापक और एआरपी की उपस्थिति अनिवार्य होगी। बैठक में शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार निर्धारित मासिक पाठ्यक्रम पूरा कराने, निपुण लक्ष्य हासिल करने, शिक्षण सामग्री के प्रदर्शन और 10 प्रमुख शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं के प्रभावी उपयोग की समीक्षा की जाएगी। विद्यार्थियों के अधिगम अंतराल को दूर करने के लिए कैच-अप शिक्षण व बच्चों में पठन संस्कृति विकसित करने के लिए पुस्तकालय और समाचार पत्र पढ़ने का बढ़ावा देने पर चर्चा होगी।
विद्यार्थियों के नियमित आकलन पर भी विशेष जोर रहेगा। निपुण एप के माध्यम से शत-प्रतिशत विद्यार्थियों का आकलन कराने, कम उपयोग वाले विद्यालयों की पहचान कर उन्हें मार्गदर्शन देने व स्पॉट असेसमेंट और निपुण विद्यालय आकलन के परिणामों के आधार पर विद्यालयों की शैक्षिक प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
प्रत्येक बैठक में दो प्रधानाध्यापकों को अपनी सफलता की कहानी साझा करनी होगी। बैठक के एजेंडे में डिजिटल शिक्षा भी शामिल है। विद्यालयों में उपलब्ध टैबलेट, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी के नियमित उपयोग की समीक्षा होगी। इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से सभी बीएसए को पत्र जारी किया गया है।
ब्लॉक स्तर पर हर महीने के चौथे शनिवार को होगी बैठक
विद्यार्थियों की प्रगति रिपोर्ट के सत्यापन और समीक्षा के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक हलचल बढ़ाई जाएगी। इसके लिए हर महीने के चौथे शनिवार को ब्लॉक स्तर पर एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी और अन्य विभागीय अधिकारी प्रधानाध्यापकों की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट का बिंदुवार आकलन करेंगे।