हरदोई। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध की शुरुआत के वक्त जिले के 19 छात्रों के यूक्रेन में फंसे होने की पुष्टि प्रशासन ने की थी। इनमें से चार छात्र भारत लौट चुके हैं, जबकि अभी भी 15 छात्रों का उनके परिजन इंतजार कर रहे हैं।
उधर, स्वदेश लौटे छात्रों का आरोप है कि यूक्रेन से रोमानिया भागते समय यूक्रेनी सेना ने उनके साथ मारपीट की और लौटने को कहा।
उधर, यूक्रेन से भारत पहुंचने के बाद संडीला के महतवाना निवासी राजेश सक्सेना के पुत्र जय सक्सेना, संडीला के हरदलमऊ निवासी शमी अहमद सिद्दीकी के पुत्र फरहान अहमद सिद्दीकी, सांडी के तेरा पुरसौली महेंद्र यादव की पुत्री वैशाली यादव, हरपालपुर के रंथपुरा निवासी संतोष यादव के पुत्र विकास यादव के परिजन काफी खुश हैं, लेकिन उनको जल्द लाडलों को अपनी आंखों से देखने की तमन्ना है।
उधर, यूक्रेन से स्वदेश लौटे और लखनऊ पहुंच रहे विकास यादव ने बताया कि यूक्रेन में ओडेसा शहर स्थित उसके अपार्टमेंट के पास सुबह सात बजे बम धमाका हुआ। उस वक्त उसके अपार्टमेंट में वह और उसके कई साथी सो रहे थे।
धमाके की आवाज से आंखें खुलीं तो सब भागने लगे। भागते हुए जब एयरपोर्ट तक का कई मीलों का रास्ता तय कर लिया तो एयरपोर्ट के बाहर से यूक्रेनी सेना के जवानों ने उन्हें लौटाना शुरू कर दिया।
इस दौरान कई लोगों के साथ मारपीट भी की। वह लोग बड़ी मुश्किल से सेना से छिपते-बचते एयरपोर्ट तक पहुंचे। विकास के पिता संतोष यादव ने बताया कि उनका बेटा सकुशल देश लौट आया है, इससे ज्यादा क्या खुशी हो सकती है।
इनको है लाडलों का इंतजार
15 परिवार अभी भी अपने लाडलों के सकुशल लौटने की खबर सुनने के लिए बेकरार हैं।
मौजमबेग, शिवम वर्मा, सुमित, नाजिया खातून, रजिया खातून, सीमा मोगिया, अपेक्षा सिंह, अभ्यंक बाजपेई, श्रेया मिश्रा, उजैस रब्बानी, अश्वनी कुमार, वीरेश कुमार, वैभव कुमार अग्निहोत्री, विकास यादव, अभिषेक सिंह के परिजन अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
अधीक्षक के बेटे समेत 50 भारतीय सुरक्षित
पिहानी। यूक्रेन पर रूसी हमलों के दौरान रोमानिया बार्डर पर फ्यूल स्टेशन पर पनाह लिए सीएचसी अधीक्षक के पुत्र प्रत्यक्ष श्रीवास्तव समेत तकरीबन 50 भारतीय मंगलवार को सुबह बार्डर क्रास कर पड़ोसी देश रोमानिया में महफूज हो गए हैं।
दो दिन पहले सभी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निकल कर रोमानिया बार्डर पहुंचे थे। यहां एक फ्यूल स्टेशन पर पनाह लिए थे। सोमवार की शाम सभी को बस से 10 घंटे के सफर के बाद रोमानिया में सुरक्षित स्थान पर बनाए गए कैंप में पहुंचा दिया गया है।
यूक्रेन के खारकीव में फंसा है वैभव
बिलग्राम। खत्राना मोहल्ला निवासी सुभाष अग्निहोत्री का पुत्र वैभव युद्ध में सबसे ज्यादा प्रभावित यूक्रेन के खारकीव शहर में ही फंसा हुआ है। वह यहां की मेडिकल यूनीवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था।
सौरभ अग्निहोत्री ने बताया कि उनका भतीजा बेहद बुरे हालात में है। ठीक से बात भी नहीं हो पा रही। न्यूज पर जब खारकीव में धमाकों की खबरें सुनते हैं, तो दिल दहल जाता है।