वर्ष 10 में ग्रामीणों का घर बैठे बैंकिंग सेवाएं
मिलने का दिखाया गया सपना अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। यह अलग बात है कि
गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने को बैंकों के करोड़ों रुपये खर्च हो
गए, मगर शासन की मंशा पूरी न हो सकी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 10 में दो
हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुुंचाने के निर्देश
दिए थे। जिसके बाद बैंकों ने रोडमैप बना तैयारियां शुरू की। यहां सबसे बड़ी ग्रामीण बैंक आर्यावर्त ग्रामीण बैंक एवं अग्रणी बैंक आफ
इंडिया ने गांवों में सुविधादाताओं की नियुक्ति की ग्रामीणों के
बायोमैट्रिक कार्ड बनाए और मशीनों की खरीद की।
इस सभी संसाधनों ो जुटाने पर
बैंकों के करोड़ों खर्च हो गए और इसके बाद भी शत प्रतिशत गांवों में
बायोमैट्रिक मशीनों तथा सुविधादाताओं से बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने का अभियान
आधा अधूरा सपना बन कर रह गया।
जिले में प्रस्तावित नई बैंक शाखाएं खोलने
की तैयारियां भी इस अभियान को झटका दे गई तो वहीं शाखा स्तर पर अफसरों की
उदासीनता इस ओर भारी पड़ गई।
सुविधादाताओं के लिए न तो गांवों में मिलने
के दिन और समय सुनिश्चित करने के साथ गांव में मिलने का स्थान एवं बोर्ड
आदि लगाने की व्यवस्थाएं हुई और न ही संजीदगी दिखाई पड़ी, जिससे ज्यादातर
सुविधादाता अभियान सुस्त पड़ने से अपनी ब्रांचों में ही बैंकिंग सेवाओं में
सहयोग कर रहे हैं।
एलडीएम पीके सिंह कहते हैं दो हजार से ज्यादा आबादी
वाले गांवों तक सुविधादाताओं से बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने को जिले में काम
हुआ है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 110 बैंक शाखाएं खुलनी प्रस्तावित
है। जिसके क्रम मेें बैंक शाखाएं खुल रही है।
इन सभी बैंक शाखाओं के खुलने
के बाद काफी हद ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं मजबूत हो जाएगी।
सुविधादाता भी गांवों में बैंकिंग सेवाओं के लिए कार्य कर रहे हैं। उधर,
केंद्र सरकार वर्ष 13 में मार्च 14 तक प्रदेश में तीन हजार नई बैंक शाखाएं
खोलने का लक्ष्य रखा था, जिसमें पहले स्थान पर बलिया और दूसरे पर हरदोई
है।
बलिया में 119 तथा हरदोई में 110 नई शाखाएं खुुलनी थी। जिसके लिए
बैंकों द्वारा तैयारियां की जा रही है। मार्च 14 लक्ष्य के अनुसार जिले में
करीब 25 बैंक शाखाएं खुली हैं और अभी भी करीब 85 बैंक शाखाएं खुलनी हैं।