पेयजल को लेकर जिला विकास अधिकारी कार्यालय में बने कंट्रोल रूम ने जिले में पेयजल की स्थिति और अधिकारियों की सक्रियता की पोल खोल दी है। अभी तक हैंडपंप खराब होने की पौने सात सौ शिकायतें आई हैं। इन शिकायतों में सवा तीन सौ से अधिक रिबोर की और करीब साढ़े तीन सौ सामान्य मरम्मत की हैं। इस पर सीडीओ ने डीपीआरओ को सामान्य मरम्मत वाले हैंडपंपों को 48 घंटे में दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि हैंडपंप ठीक न होने की जानकारी मिली तो जिम्मेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या को देखते हुए डीएम विवेक वार्ष्णेय ने डीडीओ कार्यालय में पेयजल के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है। एक सप्ताह में कंट्रोल रूम में 684 हैंडपंप खराब होने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें 338 हैंडपंप रिबोर व 346 सामान्य मरम्मत की शिकायतें आईं हैं।
सामान्य हैंडपंपों में पाइप, चैन, वासर, गंदा पानी देने आदि की शिकायतें अधिक हैं। सीडीओ राधेश्याम ने रिबोर होने योग्य हैंडपंपों की सूची जलनिगम को भेज दी है। इसके अलावा सामान्य मरम्मत वाले हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के लिए डीपीआरओ को सूची भेजी है। उन्होंने डीपीआरओ को 48 घंटे में मरम्मत योग्य हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के आदेश दिए हैं। बताया कि 278 ग्राम पंचायतों के खातों पर लगी रोक केवल हैंडपंप दुरुस्त कराने तक हटाई गई है।
सचिव व प्रधान निकाल सकते हैं पैसा
ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रधान इस खाते से केवल हैंडपंप दुरुस्त कराने का पैसा निकाल सकते हैं। हैंडपंप ठीक न कराने की शिकायत मिलने पर जिम्मेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।