पचदेवरा थाना क्षेत्र के गांव उबरीखेड़ा में
पिता-पुत्री की गोली लगने से हुई मौत का मामला एक अबूझ पहेली बनी हुई है।
पुलिस इस कहानी को यही दफन क र देना चाहती है, वहीं अगर इसकी गहराई से
तहकीकात की जाए तो कई चेहरों पर से नकाब हटाया जा सकता है।
ज्ञात हो कि
गुरुवार की शाम करीब पांच बजे उबरीखेड़ा गांव निवासी कोटेदार प्रेमपाल के
घर घटी घटना में पिता-पुत्री की मौत को हर बिंदु पर नया मोड़ देनेे का
प्रयास किया जा रहा। पहले तो परिजनों ने बदमाशों द्वारा हमले की भ्रामक
सूचना देकर गांव में दहशत फैलाई, जिस पर दर्जनों राउंड गोलियां चल गईं, पर
एक भी बदमाश दिखाई नहीं पड़ा।
वहीं घटना से कुछ समय पहले मृतक की अपने घर
में मौजूद तीन सजातीय युवकों से किस बात को लेकर नोकझोंक हुई, इसके बाद बाद
यह घटना घट गई। पुलिस भी उन्हीं युवकों को दोषी मान रही थी तो उन्हें
हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ क्यों नहीं की। परिजन भी उनके नामों का
खुलासा नहीं कर रहे।
आखिर कमरे में मृतक की पुत्री की हत्या का सच देर रात
तक क्यों छिपाया गया। वहीं अफवाह फै लाई गई थी कि बदमाश पुत्री का अपहरण
कर ले गए हैं। पहले तो पुलिस इस बात पर अड़ी रही कि एक ही गोली से
पिता-पुत्री की मौत हुई, पर जब खुलासा हुआ तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेें
अलग-अलग गोली लगने से मौत दर्शाई गई।
वहीं रात में जिले के बड़े पुलिस
अफसरों के आने पर मृतक रूपेश के पिता प्रेमपाल ने लिखित सूचना दी कि वह घर
पर नहीं थे, उनकी गैर मौजूदगी में रूपेश द्वारा राइफल की सफाई करने के
दौरान गोली चलने से यह हादसा हुआ। यह बात आम जन के गले के नीचे नहीं उतर
रही कि पहली गोली से हादसा हुआ तो दूसरी गोली किसने चलाई।
पुलिस ने बेड की
प्लाई से गोली तो बरामद कर ली, पर उसे राइफल कई घंटे बाद मिली। पुलिस इस
घटना को नया मोड़ देकर अपना पल्ला झाड़ना चाहती है। पर सवाल यह उठता है
कि आखिर इस घटना का जिम्मेदार कौन है। किस वजह से पिता-पुत्री को जान से
हाथ धोना पड़ा। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में झूठ से पर्दा उठ चुका है।