हरदोई। मौसम की मार से खेतों में गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। किसानों ने खरीद केंद्रों पर 1525 रुपये में गेहूं बेच दिया। अब गुरुवार को पहली बार बाजार में गेहूं का भाव चढ़कर 1600 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे किसानों को तो घाटा हुआ, लेकिन व्यापारी मालामाल हो रहे हैं।
पिछले वर्ष अतिवृष्टि ने गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया था। इस बार मौसम की बेवफाई ने फिर से कमाई के अरमानों पर पानी फेर दिया। जिले में गेहूं का औसत उत्पादन गिरने के साथ ही कई स्थानों पर किसानों के हाथों में लागत भी न आ सकी। इस साल रबी की मुख्य फसल गेहूं का उत्पादन 20 से 30 फीसदी गिरा है। विभागीय जानकारों के अनुसार, जिले में हर साल औसतन साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में रबी की फसलें एवं करीब सवा दो लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल किसान करते हैं। अधिकतर किसानों ने गांवों में ही व्यापारियों को गेहूं बेच दिया। अब गुरुवार को बाजार में गेहूं के दाम बढ़ने से किसान मायूस हैं तो व्यापारी और बिचौलिए गदगद हो रहे हैं।
इस तरह से मौसम ने की बेवफाई
सर्दी कम पड़ने से गेहूं के पौध में दाने अंकुरित होने से फलने फूलने के लिए पर्याप्त नमी नहीं मिली। इसके बाद अचानक मार्च में चढ़े तापमान एवं हवाओं ने गेहूं के दानों को हल्का कर दिया। जिससे गेहूं की कटाई के साथ थ्रेसरिंग के दौरान हल्के दाने भूसे के साथ निकल गए। एक हेक्टेयर में 40 से 45 क्विंटल गेहूं की पैदावार करने वाले किसानों को 30 से 32 क्विंटल गेहूं ही मिल सका। कुछ स्थानों पर तो उत्पादन 50 फीसदी तक गिरा। बरसोहिया, चौंसार, मंसूरपुर, बरगदापुरवा, सेमरिया, श्रीमऊ, बेहटा आदि क्षेत्रों में किसानों को काफी नुकसान हुआ।
मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि मौसम के साथ न देने से जिले में गेहूं का उत्पादन 30 फीसदी तक गिरा है। मांग के अनुरूप बाजार में गेहूं की आवक कम है। मई में पहली बार गेहूं का भाव मंडी में 16 सौ प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया है। गेहूं का बाजार अप्रैल से जून तक गर्म रहता है। इस लिहाज से सीजन में अब कम समय रह गया है।