परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के
लिए विभाग शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष मनाएगा। इसके लिए पूरा महकमा जुटेगा
और स्कूलों का नए तरीके से श्रेणीकरण किया जाएगा। विद्यालय के पिछड़े
बच्चों के लिए विशेष शिक्षा व्यवस्था की जाएगी।
ज्ञात हो कि परिषदीय
स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। जिसको शासन ने गंभीरता
से लिया है और स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को नए निर्देश जारी
किए हैं। इस वर्ष को शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।
स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने को स्कूल और टीचरों के
परफारमेंस का आकलन किया जाएगा।
नियमित आंतरिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
स्कूलों का नए स्तर से श्रेणीकरण किया जाएगा। स्कूल में पढ़ाई में पिछडे़
छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि उनको अन्य विद्यार्थियाें के
समकक्ष लाया जा सके। प्रारंभिक कक्षाओं में समक्ष के साथ पढ़ने-लिखने और
आंकिक दक्षता विकसित करने को विशेष प्रयास किए जाएंगे।
इसके लिए भाषा
शिक्षण के अंतर्गत श्रवण, वाचन, पठन, लेखन तथा गणित शिक्षण के अंतर्गत
विद्यार्थियों में मानसिक गणित के कौशल को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया
जाएगा। सेवारत टीचरों के लिए समयवद्ध तरीके से प्रशिक्षण कलेंडर जारी किया
जाएगा। स्कूल की प्रबंध समितियों को और सक्रिय किया जाएगा।
नियमित
निरीक्षण कर शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। हर स्कूल का रिपोर्ट
कार्ड तैयार कर उसे यू डायस पर प्रदर्शित किया जाएगा। शासन के पत्र आने के
बाद जिले में शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष मनाने की तैयारियां विभाग ने
शुरू कर दी हैं। बीएसए डा. बृजेश मिश्र ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप
स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।