हरदोई। माध्यमिक शिक्षा परिषद के वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक कक्ष निरीक्षक के स्थान पर परीक्षक बनाना चाहते हैं। मूल्यांकन केंद्रों पर बोर्ड से परीक्षक के न आने से स्थानीय स्तर पर परीक्षकों की नियुक्ति की गई है, लेकिन इसमें कई ऐसे वित्तविहीन शिक्षक हैं, जिनका विवरण वेबसाइट पर अपलोड नहीं है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबंध जिले में 635 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 508 वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों के शिक्षकों का विवरण विद्यालयों ऑनलाइन परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। उसी के आधार पर शिक्षकों की कक्ष निरीक्षकों के रूप में परीक्षा केंद्रों पर लगाई गई थी।
परीक्षा के दौरान परिषद की ओर से लगाए गए शिक्षक परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी करने नहीं पहुंचे। वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों की उपस्थिति कक्ष निरीक्षक केे रूप में न के बराबर रही। सिर्फ जिन विद्यालयोंं में परीक्षा केंद्र था, वहीं के शिक्षक ही विद्यालय पहुंचे।
वहीं मूल्यांकन के लिए भी बोर्ड से परीक्षकों को लगाया गया, मगर मूल्यांकन केंद्रों पर बोर्ड से लगाए गए 30 से 35 प्रतिशत परीक्षक नहीं पहुंचे। उनके स्थान पर विभागीय नियमानुसार स्थानीय स्तर पर विद्यालय प्रधानाचार्य के अनुमोदन के बाद मूल्यांकन केंद्र पर शिक्षक को परीक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया गया।
अब इनमें अधिकांश शिक्षक ऐसे हैं, जिनका विवरण विद्यालय की ओर से वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार वित्तविहीन विद्यालयों ने कई ऐसे शिक्षकों का अनुमोदन किया है, जो उनके विद्यालय के शिक्षक ही नहीं है। मूल्यांकन में परीक्षकों को हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिका के लिए प्रति उत्तर पुस्तिका 11 रुपये और इंटर की उत्तर पुस्तिका के लिए 13 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका दिया जाता है।
इससे परीक्षक बनाने के लिए शिक्षक पहुंच जाते हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक बाल मुकुुंद प्रसाद ने बताया कि प्रधानाचार्य के अनुमोदन पर ही परीक्षक की नियुक्ति की जाती है। स्थानीय स्तर पर तैनात परीक्षकों के विवरण की जांच कराई जाएगी।