हरदोई। मेडिकल कॉलेज प्रशासन दवाओं की कमी को दूर करने का वादा तो लगातार करता आ रहा है लेकिन फार्मेसी में दवाओं की किल्लत कम नहीं हो रही। डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद जब मरीज काउंटर पर दवा लेने जाता है तो इक्का दुक्का दवा देकर मेडिकल स्टोर का रास्ता दिखा दिया जाता है। स्थिति यह है कि विटामिन और कैल्शियम की दवा तक मरीजों को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना जिले के दूर दराज से मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। चिकित्सीय परामर्श के लिए मरीज सुबह से ही जुटने लगते हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद जब मरीज दवा लेने काउंटर पर पहुंचते हैं तो मरीजों को पर्चे पर लिखी आधी अधूरी दवा देकर टरका दिया जाता है। दवा लेने आए 95 प्रतिशत मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं। दवाओं की किल्लत लगातार बनी हुई है। हर बार यह दावा किया जाता है कि मरीज अधिक होने की वजह से दवाएं कम हो जाती हैं लेकिन समय रहते उनको पूरा कर लिया जाता है।
इसके बाद भी तमाम दवाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर ही जाना पड़ रहा है। दर्द और चोट के मरहम के ट्यूब और खांसी के सिरप तो लंबे समय से नहीं मिल रहे। अब तो विटामिन और कैल्शियम की दवाओं के लिए काउंटरों से बैरंग कर दिया जाता है। निजी स्टोर पर दवाओं के नाम पर मरीजों से कई गुना अधिक कीमत वसूली जा रही है। ऐसे में कई मरीजों का इलाज बीच में ही छूटने की नौबत आ जाती है।
जन औषधि केंद्र पर भी सभी दवाएं नहीं
केस-1- शहर निवासी शशांक बुखार व कमजोरी होने पर दवा लेने आए थे। डॉक्टर को दिखाने के बाद जब काउंटर पर दवा लेने आए तो एक भी दवा नहीं मिली। जन औषधि केंद्र पर दवा लेने के लिए कहा गया, यहां पर भी सभी दवाएं नहीं हैं।
केस-2- मुकेश कुमार ने बताया कि चर्म रोग विभाग में डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने पर्चे पर पांच दवाएं लिखीं लेकिन सिर्फ एक ही दवा मिली। इसमें लिखी विटामिन सी की गोली भी काउंटर पर नहीं मिली।
वेयरहाउस से दवाएं मंगाने में बरती जा रही लापरवाही
विभागीय जानकारों के मुताबिक दवाओं का संकट कमी की वजह से नहीं बल्कि डिमांड और मैनेजमेंट में लापरवाही की वजह से है। वेयरहाउस में दवाएं मौजूद हैं लेकिन समय पर इंडेंट न भेजे जाने और ट्रांसपोर्टेशन की सुस्ती के कारण फार्मेसी के रैक खाली पड़े हैं। बता दें कि वेयर हाउस में विटामिन और कैल्शियम के अलावा दर्द के ट्यूब और अन्य दवाएं मौजूद हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज की प्रशासनिक लापरवाही के कारण दवाएं नहीं आ रही हैं।
शासन स्तर से भी सभी सूचीबद्ध दवाओं के लिए आग्रह किया गया। दवा काउंटर पर जो दवाएं नहीं हैं उनके लिए डिमांड करते ही दो से तीन दिन में दवा आ जाती है। वेयर हाउस में स्टॉक है तो उसे तत्काल मंगवाकर मरीजों को वितरित कराया जाएगा। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य
फोटो- 34- मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर लगी मरीजों की कतार। संवाद
फोटो- 34- मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर लगी मरीजों की कतार। संवाद