हरदोई। सैटेलाइट की मदद से पराली जलाने के मामले तेजी से प्रकाश में आ रहे हैं। जहां भी पराली जली अफसर कुछ ही देर में पहुंच जाते हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अफसर सैटेलाइट से कूड़ा जलता नहीं देख पा रहे हैं। अफसरों की इस कार्यप्रणाली के कारण सवायजपुर मार्ग पर रोजाना कूड़े को आग लगाई जा रही है। आसपास रहने वाले करीब तीन हजार लोगों का सांस लेना दुश्वार है। इस मार्ग से गुजरने वाले करीब 10 हजार राहगीर भी हानिकारक धुएं से प्रभावित हैं।
दिल्ली, एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर यहां पर भी अलर्ट है लेकिन, यह अलर्ट फसलों के अवशेष जलाने पर कार्रवाई तक ही सीमित है। नगरीय निकाय के कर्मचारी बड़ी मात्रा में कूड़ा जलाकर प्रदूषण फैला रहे हैं। इसकी न तो सैटेलाइट फोटो ले पा रहा है और न ही जिम्मेदारों की नजर ही इस ओर दौड़ती है। सवायजपुर मार्ग पर किनारे तत्योरा के पास सुलगता कूड़ा इसका बड़ा उदाहरण है।
मार्ग पर विकसित हुए नवीन मोहल्ला में रहने वाले लोगों में खांसी व सांस की बीमारी बढ़ रही है। यहां ओमप्रकाश शर्मा, मोहम्मद कासिब, राजेश कुमार, दिनेश प्रसाद, देवी दीन व राजरानी ने बताया कि दूषित धुआं घरों तक में घुसता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। दुर्गंध भी परेशान करती है। लगभग दिन भर कूड़ा जलने से बच्चों और बुजुर्गों को खासी परेशानी होती है। अफसरों से शिकायत की लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
प्रदूषण बना लोगों के लिए मुसीबत, बढ़े मरीज
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में पिछले 15 दिनों से इजाफा हुआ है। सबसे अधिक मरीज प्रदूषण के शिकार हैं। चेस्ट विभाग के डॉ. शिवम गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को ओपीडी में 120 मरीजों को परामर्श दिया। इसमें 50 मरीज प्रदूषण की वजह से बीमार मिले हैं। 30 अस्थमा के रोगी आए। यह पहले से ही बीमार थे। करीब 20 मरीज टीबी के आए, इनको भी परामर्श दिया गया। बताया कि सर्दी में जो बुजुर्ग बीमार हैं, वह समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहें। प्रदूषण से बचने का प्रयास करेंं। सुबह-शाम को गर्म पानी की भाप लेते रहें। मास्क का प्रयोग करें।
कूड़ा जलाए जाने पर जारी नोटिस के जवाब में नगर पालिका परिषद के अधिकारी ने रिपोर्ट दी है। इसमें बताया है कि अब तत्योरा के पास कूड़ा नहीं डाला जा रहा है, कूड़ा नीर में डलवाया जा रहा है। अधिशासी अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि पहले से जल रहे कूड़े को 24 से 36 घंटे के अंदर जेसीबी मशीन लगाकर मिट्टी की ढकवा दिया जाए। मिट्टी पड़ने से आग बुझ जाएगी, इससे प्रदूषण पर विराम लगेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ है तो वह टीम भेजकर जांच कराएंगे। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी।