हरदोई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार को लेकर भले ही जीरो टालरेंस की नीति अपना रहे हों, लेकिन कई विभागों के जिम्मेदार कमाई के लिए आंखें बंद कर लेते हैं। विकास कार्याें में पारदर्शिता बरतने के उद्देश्य से जारी किए गए शासनादेश को माधौगंज विकास खंड के जिम्मेदारों ने ताक पर रख दिया। जिम्मेदारों की बंद आंखों ने लूट के रास्ते खोल दिए, लेकिन अमर उजाला के खुलासे के बाद अब डीएम के तेवरों से खलबली मची है।
अपर मुख्य सचिव ने वर्ष 2022 के मार्च माह में एक शासनादेश जारी किया था। इस शासनादेश में स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत के कर्मचारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, ब्लाक प्रमुख, सहायक विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, पंचायत सहायक, संविदा पर पंचायत राज विभाग और ग्राम्य विकास विभाग में तैनात कर्मचारी (संविदाकर्मी भी) ग्राम पंचायत निधि, क्षेत्र पंचायत निधि और मनरेगा के तहत न तो कोई कार्य करेंगे और न ही इनकी फर्माें को कोई भुगतान किया जाएगा।
साथ ही इनके सभी रिश्तेदारों को भी काम और भुगतान देने पर पाबंदी लगाई थी। इसके बाद भी माधौगंज विकास खंड में ग्राम पंचायत अधिकारी के भाई की फर्म को काम और भुगतान दे दिया गया। खास बात तो यह है कि शासनादेश जारी होने के चार माह बाद तीन अगस्त 2021 को ग्राम पंचायत अधिकारी ब्रजेंद्र पाल सिंह के भाई सतेंद्र कुमार की फर्म का पंजीकरण कराया गया। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी, ब्लाक के लेखाकार समेत अन्य जिम्मेदारों ने शासनादेश को लेकर आंखें बंद रखीं ओर पंजीकरण करने के साथ ही भुगतान भी करते गए।
दो खंड विकास अधिकारी और एक लेखाकार आएगा जद में
ग्राम सचिव के भाई की फर्म का पंजीकरण तीन अगस्त 2021 को किया गया था। उस वक्त माधौगंज में संयुक्त खंड विकास अधिकारी के पद पर रमेश कुमार तैनात थे, जो अब आजमगढ़ स्थानांतरित हो चुके हैं। चार फरवरी 2023 से यहां संजय कुमार की तैनाती है। उक्त फर्म को सारे भुगतान इन्हीं दो के कार्यकाल में हुए हैं। इसी तरह अधिकांश भुगतान लेखाकार के पद पर तैनात रहे सचिन रस्तोगी के कार्यकाल के हैं। सचिन रस्तोगी अब पिहानी में लेखाकार के पद पर तैनात हैं।
फर्म के प्रोपराइटर ने दिया था झूठा शपथ पत्र
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, फर्म का पंजीकरण कराते समय नवप्रभात कंस्ट्रक्शन का पता मल्लावां कस्बे के मोहल्ला बाजीगंज बताया गया था। फर्म के प्रोपराइटर सतेंद्र कुमार ने शपथ पत्र दिया था कि उनके परिवार का काेई भी सदस्य ग्राम्य विकास विभाग और पंचायत राज विभाग में नहीं है। जबकि उनका सगा भाई ही ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर उसी विकास खंड में तैनात है, जहां से उसे भुगतान किया गया।