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361 लेखपालों पर लगा एस्मा

Sat, 03 Sep 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
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प्रदर्शन करते लेखपाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हरदोई। कई दिनों से चल रही लेखपालों की हड़ताल को सरकार ने अवैध घोषित कर नोटिस जारी करने के निर्देश दे दिए हैं। लेखपालों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया तो उनके घरों में नोटिस चिपकाए जा रहे हैं। जिले के 360 लेखपालों पर एस्मा लगाया गया है। सदर तहसील के 141 लेखपालों पर एस्मा भी लगा दिया गया है।
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विभिन्न मांगों को पूरा करवाने के लिए 23 अगस्त से लेखपालों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। तहसील मुख्यालयों के बाद जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन और जूलूस निकालकर नारेबाजी चल रही थी। हड़ताल से जाति, आय, निवास आदि प्रमाण पत्रों के काम के साथ अन्य काम भी ठप हो गए। शासन ने बुधवार को हड़ताल अवैध घोषित कर लेखपालों को काम पर लौटने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद लेखपाल काम पर नहीं लौटे।

इस पर लेखपालों को नोटिस देने के साथ एस्मा भी लगा दिया गया है। जिले में भी 361 लेखपालों पर एस्मा लगाया गया है। सदर तहसीलदार प्रभाकर त्रिपाठी ने बताया कि लेखपालों को काम पर लौटने के नोटिस जारी किए गए हैं। लेखपालों ने नोटिस नहीं लिए। अब नोटिस उनके घरों पर चिपकाए जा रहे हैं। लेखपाल संघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने लेखपालों के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा की हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
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तहसील में चलती रही हड़ताल  
हरदोई। अवैध घोषित करने के बावजूद जिले में 12वें दिन हड़ताल जारी रही। सदर तहसील में लेखपाल धरने पर बैठे और जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष सुनील यादव, मंत्री एश्वर्य प्रकाश मिश्र, राजीव सिंह भदौरिया, राजेश गुप्ता, हीरालाल, फीरंगलाल, महेश चंद्र श्रीवास्तव, राजीव लोचन पंत, गयावत्स सिंह, सर्वेश राजवंशी, संजय मिश्र आदि मौजूद रहे।

हड़ताल से बाधित हो रहे काम
शाहाबाद। लेखपालों की हड़ताल से तहसील के  काम ठप हैं। खास तौर से खसरा, खतौनी निकलवाने आए किसानों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। तहसील में विभिन्न समस्याओं को लेकर आने वाले फरियादियों द्वारा एसडीएम तथा तहसीलदार को दिए गए प्रार्थना पत्रों की समय से जांच नहीं हो पा रही है। राशन वितरण की निगरानी का कार्य भी बाधित है। इसके  साथ ही हड़ताल पर रहने के कारण लेखपाल समाधान दिवस में भी नहीं पहुंच रहे हैं। जिससे थानों से संबंधित समस्याओं का भी निराकरण नहीं हो पा रहा है।
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