हरदोई। लोनार कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सदुल्लापुर में हत्याभियुक्त पूर्व प्रधान ने तमंचे से गोली मारकर खुदकुशी कर ली। मृतक को हत्या के मामले में आजीवन कारावास उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी थी और पुलिस ने उसे फरार घोषित कर दिया था।
ग्राम सदुल्लापुर निवासी सुरेश पाल सिंह यादव (70) ने गुरुवार रात गांव में ही स्थित अपने बघ्घर (बंगला) में तमंचे से खुद को गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर सुरेशपाल का पुत्र धीरेंद्र सिंह भागकर अन्य ग्रामीणों के साथ बघ्घर पहुंचा। जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक सुरेश की मौत हो चुकी थी।
मौके पर पास में ही तमंचा पड़ा था। सुरेश ने सीने में गोली मार ली थी। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ लग गई। पिता का शव देख धीरेंद्र बदहवास हो गया। लोगों ने किसी तरह उसे समझाया, फिर पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। लोनार कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक एसके श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल की।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पुत्र धीरेंद्र सिंह ने बताया कि उसके पिता 20 साल तक ग्राम प्रधान रहे। 13 मार्च 1983 को गांव में राधेश्याम नाम के व्यक्ति की हत्या हो गई थी। राधेश्याम के भाई श्रीकृष्ण ने सुरेश पाल सिंह, उनके भाई नरेशपाल सिंह, पिता जंगी सिंह, गांव के ही जागेश्वर और रामबाबू के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
न्यायालय ने सभी आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। यह अपील भी खारिज हो गई थी। 16 मार्च 2016 को उच्च न्यायालय ने उम्र कैद की सजा बरकरार रखी थी। इस पर पुलिस ने नरेशपाल सिंह, जागेश्वर और रामबाबू को जेल भेज दिया था, जबकि सुरेश पाल सिंह फरार चल रहे थे।
उनके विरुद्ध 12 अगस्त 2016 को कुर्की की गई थी। 19 जुलाई को गिरफ्तारी का वारंट भी जारी हो गया था और पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही थी। धीरेंद्र सिंह ने बताया कि वह भी वर्ष 2005 से 2010 तक गांव का प्रधान रह चुका है। गत पंचायत चुनाव में उसकी मां चुनाव लड़ी थीं लेकिन हार गईं।
हाजिर होने आए थे दुनिया से हो गए गैरहाजिर
सूत्र बताते हैं कि डेढ़ साल से फरार चल रहे सुरेश पाल सिंह यादव गुरुवार रात लगभग 12 बजे गांव पहुंचे थे। गांव के शिवराम के बघ्घर में बैठकर उन्होंने सालिगराम, सुरेंद्र, शिवप्रसाद और मेघनाद से काफी देर तक बातचीत की थी। इन लोगों की मानें तो सभी ने उन्हें समझाया था कि न्यायालय में हाजिर हो जाना चाहिए। इस पर सुरेश ने जवाब दिया था कि वह हाजिर होने के लिए ही गांव आए हैं। शुक्रवार को जाकर न्यायालय में हाजिर हो जाएंगे। इसके बाद सुरेश अपने बघ्घर में चले गए और सुबह उन्होंने खुदकुशी कर ली।