आरआर इंटर कालेज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान विभिन्न प्रसंग सुनाते हुए संत गिरिधर गोपाल ने कहा कि हमारा व्यवहार जिसमें अहम न हो और प्रेममय वाणी हो, व्यवहार में सरलता के साथ प्रभु के प्रति समर्पण हो तभी जीवन में आनंद आएगा।
उन्होंने क हा कि हमें अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर जीवन को मधुरता की राह पर लाना चाहिए। सुख-दु:ख तो दिन-रात की तरह हैं जो आते जाते रहते हैं। हमें दु:ख में घबराना नहीं चाहिए तथा सुख में इतराना नहीं चाहिए। सुख-दु:ख और अमीरी-गरीबी में एक समान सद्व्यवहार और सदाचार करने वाले जीवन में आनंद और शांति की अनुभूति अवश्य करते हैं।
हमें हर समय ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। भगवान तो भाव को जानते हैं और भाव को ही समझते हैं, चढ़ावा और दिखावा करना भक्ति नहीं है। उन्होंने विदुर के घर भगवान श्रीकृष्ण के साग खाने तथा दुर्योधन की मेवा त्यागने और श्रीराम के शबरी के जूठे बेर खाने के प्रंसग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।