हरदोई। 182 बेड वाला जिला अस्पताल खुद बीमार है। अस्पताल की सबसे महत्वपूर्ण सेवा इमरजेंसी वार्ड नंबर 12 की गैलरी में संचालित है। करीब सात बाई बीस फीट की गैलरी में छह स्ट्रेचर पड़े हैं। इन्हीं पर गंभीर हालत में आने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार किया जाता है कई बार एक मरीज के पैर दूसरे के सिर तक पहुंच जाते हैं। वार्ड नंबर 12 की छत का प्लास्टर उखड़ कर गिर रहा है। इसी वार्ड में बेड के गद्दे भी फटे पड़े हैं। इन्हीं पर मरीजों को लिटाया जाता है। वार्ड में लगी कई आक्सीजन किट खराब पड़ी हैं।
पिछले दिनों अस्पताल का निरीक्षण करने आए डीएम विवेक वार्ष्णेय ने आक्सीजन किट दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद व्यवस्था जस की तस है। ओपीडी कक्ष के बाहर रखे शेड की टीन टूटी है। यहां लगे पंखे भी नहीं चलते हैं। अस्पताल परिसर में चारों ओर गंदगी फैली है और सूअर मंडराते रहते हैं। परिसर में ही अस्पताल में बनी कालोनियों का पानी भरा रहता है। अस्पताल के कई वार्डों के एग्जास्ट फैन भी गायब हैं। अस्पताल परिसर में लगा एक हैंडपंप भी लंबे समय से खराब पड़ा है।
हृदय रोग के डाक्टर नहीं
जिला अस्पताल में आईसीयू तो बना है लेकिन इसमें हृदय रोग के डाक्टर नहीं हैं। कई वर्षों से पद रिक्त है। पिछले साल तक प्रदेश सरकार में प्रतिनिधित्व कर रहे सदर विधायक के पास स्वास्थ्य मंत्रालय था, इसके बावजूद अस्पताल में डॉक्टर की पद स्थापना नहीं हो सकी। एक फिजीशियन और चेस्ट फिजीशियन का पद रिक्त है। हड्डी रोग विशेषज्ञ का एक पद लंबे समय से रिक्त है। स्टोर कीपर भी नहीं है।
प्राइवेट एंबुलेंस की अंधेरगर्दी
जिला अस्पताल के बाहर हर समय आधा दर्जन से अधिक एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। इन एंबुलेंस से अस्पताल में सक्रिय दलालों और लखनऊ के निजी अस्पतालों से संपर्क रहता है। रेफर होने वाले ज्यादातर मरीजों को दलाल एंबुलेंस चालकों के हवाले कर देते हैं। प्राइवेट एंबुलेंस चालक तीमारदारों से मनमाना किराया तो वसूलते ही हैं ज्यादातर को अपने कमीशन वाले वाले अस्पताल में ही ले जाते हैं।
सीएमएस बोले...
सीएमएस आरके मिश्र का कहना है कि मेरी तैनाती के पहले से इमरजेंसी सेवा गैलरी में चल रही है। जहां तक एग्जास्ट फैन हटाने और गद्दे फटे होने की बात है तो इसकी जानकारी कर व्यवस्था ठीक कराई जाएगी। आक्सीजन किटें ठीक कराने के निर्देश दे दिए गए हैं, जल्द ही दुरुस्त हो जाएंगी। इमरजेंसी के सामने नया कांप्लेक्स बनना है। टेंडर हो चुका है, पैसा भी आ गया है। इसका निर्माण होने पर सारी समस्याओं का निदान हो जाएगा।