हरदोई। जिले के ब्लड बैंक को राज्य रक्त संचरण परिषद ने कंपोनेंट सेपरेटर उपलब्ध करा दिया है। इस सुविधा से एक यूनिट ब्लड को चार भागों में बांटा जा सकेगा। ऐसा होने पर जरूरत के हिसाब से एक यूनिट ब्लड से ही चार लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
दरअसल, नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) द्वारा कराए गए आनलाइन असेसमेंट टेस्ट में प्रदेश के सिर्फ 11 ब्लड बैंक ही खरे उतरे। इनमें हरदोई जिला चिकित्सालय का ब्लड बैंक भी शामिल है।
जिले के ब्लड बैंक की इस उपलब्धि पर राज्य रक्त संचरण परिषद ने भी बधाई दी और ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर उपलब्ध कराया है। जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक लैब प्रभारी मोहम्मद अकील खान ने बताया कि अभी तक एक यूनिट रक्त लिया और लोगों को चढ़ा दिया जाता था।
लेकिन अब एक यूनिट को इस कंपोनेंट सेपरेटर के जरिए पीआरबीसी, प्लेट्लेट्स, क्रायो प्रेसीपीटर और प्लाज्मा चार भागों में बांटा जाएगा। जिसके बाद जरूरत के हिसाब से रोगियों को चढ़ाया जाएगा।
नाको द्वारा चयनित ब्लड बैंकों की सूची राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी एवं राज्य संचरण परिषद को भी उपलब्ध कराई गई है। संचरण परिषद रक्त सुरक्षा के संयुक्त निदेशक अशोक शुक्ला ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र जारी कराया है कि नाको ने वाराणसी, लखनऊ, अलीगढ़, कानपुर, इलाहाबाद, बरेली, मुजफ्फरनगर, इलाहाबाद, आजमगढ़ की ब्लड बैंक के साथ जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक को भी शामिल किया है। शीघ्र ही इन ब्लड बैंकों के प्रभारियों को नवीन जानकारियां देने के लिए जयपुर में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा जिसमें जिले का भी प्रतिनिधित्व होगा। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मिश्रा, ब्लड बैंक प्रभारी मोहम्मद अकील को बधाई दी है।
राज्य रक्त संचरण परिषद की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि नाको ने रक्त संचरण के जो मानक ब्लड बैंकों को अपनाने के निर्देश दिए थे उन्हें परखा। सबसे अच्छा रक्तदाता स्वैच्छिक रक्तदाता माना गया है जिन ब्लड बैंकों में स्वैच्छिक रक्तदाता अधिक संख्या में रहे हैं उनको शीर्ष पर रखा गया है। इसके अलावा ब्लड स्टोरेज, ब्लड सप्लाई और ब्लड क्वालिटी को लेकर स्कोर दिए गए हैं। इन सभी पर खरे उतरने वाले 11 ब्लड बैंकों को शामिल किया गया है।
जिला ब्लड बैंक लैब प्रभारी मोहम्मद अकील ने बताया कि नाको ने जिन 11 ब्लड बैंकों को चयनित किया है उनसे नाको को काफी उम्मीदें भी हैं। जयपुर में प्रशिक्षण दिलाकर इन बैंकों को आधुनिक तकनीक अपनाने के गुर समझाये जाएंगे। इसके अलावा जो भी संसाधन ब्लड बैंक में कम होंगे उनकी पूर्ति कराई जाएगी।
जिला चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक को वर्ष 1997 में जनपद स्तर के ब्लड बैंक का लाइसेंस मिला था। इसके बाद अब तक इसे मेजर ब्लड बैंक का दर्जा मिल चुका है। साथ ही, राज्य संचरण की ओर से इसे सम्मानित भी किया जा चुका है।
ब्लड बैंक को कंपोनेंट उपलब्ध होने के बाद ब्लड बैंक एक साल यानी 365 दिनों में करीब 14 हजार लोगों की जान बचाने में सक्षम होगा। अभी तक बैंक एक साल में 3500 यूनिट रक्त दे रहा है। कं पोनेंट सेपरेटर लगने के बाद एक यूनिट से चार लोगों की जान बच सकेगी। इस हिसाब से 14000 लोगों को जीवनदान मिल सकेगा।