हरदोई। अपने घर के सपनों पर निर्माण सामग्रियों की कीमतों में आई उछाल से ग्रहण लग गया है। इसके साथ ही भूखंडों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने से समस्या और बढ़ गई है।
निर्माण सामग्रियों की कीमतों में इस वक्त 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। साथ ही मिस्त्री और मजदूरों ने भी अपनी दिहाड़ी बढ़ा दी है। बढ़ती आबादी के बीच घरों की जरूरत भी बढ़ रही है।
हर किसी का अपना एक अदद घर होने का सपना होता है। इन सपनों पर निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें ग्रहण लगा रही हैं। सबसे ज्यादा कीमतें भूखंडों की बढ़ रही हैं।
कोरोना के बाद भी भूखंडों के व्यापार में कोई कमी नहीं आई है। पांच वर्षों में कमोवेश कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं। कहीं-कहीं तो यह कीमतें तीन गुना तक पहुंच गई हैं।
इसके कारण आम लोगों के लिए अब भूखंड खरीद कर अपना आशियाना बना पाना फिलहाल आसान नहीं रह गया है, क्योंकि भवन बनाने के लिए सीमेंट, सरिया, मौरंग, बालू, राजमिस्त्री से लेकर मजदूरी तक के रोड डेढ़ से दो गुना हो गए हैं। इसके साथ ही जमीन के रेट भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
शहर के आस पास भूखंडों की कीमत दो हजार स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है, जबकि शहर के मुख्य मार्गों के आसपास यह कीमतें तीन हजार से पांच हजार स्क्वायर फीट तक पहुंच रही हैं।
इतना ही नहीं शहर के बाहर भी मुख्य मार्गों पर आन रोड जमीनों का भाव दो हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट पहुंच गया है। 40 लाख से अधिक आबादी एवं लगभग 12 लाख परिवार वाले इस जिले में अभी भी 20 से 30 फीसदी लोगों के पास अपना पक्का आशियाना नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों में आवास योजनाओं के माध्यम से हजारों गरीबों को अपनी छत और आशियाना मिला है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों को ही ज्यादा लाभ मिला है। शहरी क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग अपने आशियाने का सपना पूरा होने की राह देख रहे हैं।
मनमाने रेट पर अंकुश नहीं
शहर के आसपास लगे गांवों तक में जमीन के भाव काफी ऊंचे चल रहे हैं। मेन सिटी में तो घर बनाना सिर्फ कल्पना है। ऐसे में निर्माण सामग्री के बढ़ रहे दाम लोगों को झकझोर रहे है।
खास बात यह है कि मंहगी होती निर्माण सामग्री पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास नहीं हो रहे, जिसके कारण बालू, मौरंग, गिट्टी, मार्बल डस्ट आदि मनमाने रेट पर बेची जा रही है।
आवासीय योजना नहीं आई
1980 के दशक में आवास विकास द्वारा शहर में आवास विकास कालोनी बसाई गई थी। उससे पहले प्रहलादपुरी के रूप में लघु आवासीय कालोनी विकसित की गई थी।
इसके बाद से शहर के लिए कोई आवासीय कालोनी नहीं आई है। जिसके चलते शहर के आसपास लोगों को आवासीय जरूरतों के लिए डीलरों आदि पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
प्रमुख निर्माण सामग्री की कीमतें
सामग्री पहले अब
ईंट (एक) 6 रुपये 8 रुपये
बालू फीट 32 रुपये 38 रुपये
मौरंग फीट 35 रुपये 47 रुपये
सीमेंट बैग 285 रुपये 350 रुपये
सरिया क्विंटल 6200 रुपये 8500 रुपये
मिस्त्री दिहाड़ी 300 रुपये 500 रुपये
श्रमिक दिहाड़ी 200 रुपये 300 रुपये
क्या कहते हैं जानकार
निर्माण सामग्री खरीदने के समय दुकानदार से पक्का बिल लेना चाहिए। यदि कोई पक्का बिल नहीं देता है तो उसकी शिकायत जिला प्रशासन से करना चाहिए।
भूखंडों की खरीद करने से पहले उसके बारे में संबंधित विभाग से मानचित्र स्वीकृति आदि के बारे में पता करना चाहिए।
- जीएस मिश्रा, एडवोकेट