- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्राम पंचायतोें में हुई है खरीद
- जिम्मेदारों से लेकर फर्म मालिकों तक में अफरा-तफरी का माहौल
आनंद मिश्रा
हरदोई। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के जरिए ग्राम पंचायतों को साफ सुथरा बनाने की योजना में भी जिम्मेदारों ने गंदगी कर दी। चहेती फर्माें को फायदा पहुंचाने के लिए खरीद के लिए जारी शासनादेश की ही अनदेखी कर दी।
शासन से निर्देश थे कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गांवों में ई-रिक्शा की खरीद जेम पोर्टल के जरिए की जाए। जिले में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों ने ई-रिक्शा तो खरीदे, लेकिन जेम पोर्टल से नहीं। खरीद में मनमानी पर अब डीएम ने सख्त रुख दिखाया है। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी से जेम पोर्टल के जरिए खरीदे गए ई-रिक्शा का ब्योरा तलब किया है। इधर ब्योरा तलब हुआ है और उधर ग्राम पंचायतों से लेकर फर्म मालिकों तक में खलबली मची है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी यानी रिकवरी रिसोर्स सेंटर) का निर्माण बड़ी संख्या में कराया गया है। पंचायत राज विभाग के मुताबिक जनपद के 770 गांवों में आरआरसी का निर्माण हो चुका है और 550 गांवों में आरआरसी का निर्माण अभी चल रहा है।
आरआरसी तक कूड़ा पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा खरीदने की व्यवस्था भी की गई थी। इसकी खरीद स्वच्छ भारत मिशन के साथ ही ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्यवित्त के बजट से भी इस्तेमाल किए जाने की अनुमति दी गई थी। इस सबके साथ शासनादेश में यह भी कहा गया था कि ई-रिक्शा की खरीद जेम पोर्टल के जरिए की जाए। जनपद में किसी भी ग्राम पंचायत ने जेम पोर्टल से ई-रिक्शा की खरीद की ही नहीं है। हकीकत यही है कि चहेती फर्माें से मनमाने ढंग से ग्राम पंचायतों ने ई-रिक्शा की खरीद की है।
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चहेती फर्माें से इसलिए की जाती है ई-रिक्शा की खरीद
विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि चहेती फर्माें से ही ई-रिक्शा की खरीद के पीछे बड़ी वजह भी है। आम तौर पर कूड़ा कलेक्शन के लिए ई-रिक्शा एक लाख रुपये से सवा लाख रुपये के बीच में मिल जाता है। ग्राम पंचायतों ने एक ई-रिक्शा की खरीद पर 1.80 लाख रुपये तक खर्च किए हैं। भुगतान सीधे फर्म के खाते में जाता है। बाद में फर्म संचालक 80 हजार रुपये से 65 हजार रुपये तक खरीदारों को बतौर कमीशन वापस करते हैं। वापस किए गए रुपये में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही कुछ सरकारी कर्मचारियों का भी हिस्सा होता है। यही वजह है कि चहेती और चुनिंदा फर्माें से ही ई-रिक्शा की खरीद की गई है।
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डीपीआरओ से इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है डीएम ने
- जिले में कितने ई-रिकशा ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों से खरीदे गए हैं।
- किस फर्म से कितने ई-रिक्शा खरीदे गए हैं।
- ई-रिक्शा के लिए कितना बजट खर्च किया गया है।
- एक ई-रिक्शा का मूल्य कितना है।
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जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार सिंह बताते हैं कि डीएम का पत्र मिलने के बाद ब्योरा निकलवाया जा रहा है। उनका कहना है कि 700 आरआरसी बने हैं। इनमें से 50 फीसदी गांवों में तो ई-रिक्शा की खरीद हुई ही है। नियम के मुताबिक जेम पोर्टल से ही खरीद होनी चाहिए थी, लेकिन लगता नहीं है कि जेम पोर्टल से खरीद की गई होगी। उनके स्तर से ग्राम पंचायतों को तय प्रक्रिया पूरी कर किसी भी दुकान से ई्र-रिक्शा खरीदने के लिए निर्देशित कई बार किया जा चुका है।
वर्जन
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए ई-रिक्शों का ब्योरा मांगा है। जिस किसी ने भी शासनादेश की अनदेखी की होगी, उस पर कार्रवाई जरूर होगी। गड़बड़ी करने वालों को कोई बचा नहीं पाएगा। मंगला प्रसाद सिंह, डीएम, हरदोई