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शहीद बच्चों के हक में दुआ को उठे हाथ

Fri, 19 Dec 2014 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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पाकिस्तान के आर्मी स्कूल में आतंक हमलों में शहीद बच्चों के लिए शुक्रवार को नगर की विभिन्न मस्जिदों में दुआएं कराई गईं। इसके अलावा कुल्लही स्थित मकतब में मासूम बच्चों ने कुरानख्वानी से बच्चों के लिए दुआएं कीं। मुफ्ती नजीब कासमी ने इसे कायराना कदम बताते हुए कहा कि इसलाम में ऐसे लोगों को जालिम कहा गया है।
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पाक में आतंकी हमले के शहीदों के लिए नगर की जामा मसजिद मगफिरत की दुआएं कराई गईं। इसके अलावा इस्लामगंज, मसजिद फारूके आजम और बस स्टैंड की मसजिद पर भी नमाजे जुमा के बाद मुसलिमों ने मासूमों की मौत पर उनकी मगफिरत और परिजनों के लिए सब्र की तौफीक देने को अल्लाह से दुआ की।

जामा मसजिद में संचालित मदरसा दारुल उलूम मोहम्मदिया के छात्रों ने भी फातिहा ख्वानी कर शहीद बच्चाें के हक में दुआएं कीं। इस दौरान अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष वजीहुज्ज़मां फारूकी, इमाम मौलान सुलेमान, मौलाना नसीमुददीन, हािफज अफजाल, मुंशी इकबाल, जियाउल हक व मौलाना अनीस आदि मौजूद थे।
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कुल्लही गांव में कासमी एजुकेशनल सोसाइटी के तहत संचालित मकतब में भी बच्चों ने शहीद पाकिस्तानी बच्चों के लिए कुरान ख्वानी की। इसके बाद मुफ्ती नजीब ने उनकी मगफिरत के लिए दुआएं कीं। मुफ्ती नजीब कासमी ने कहा कि इसलाम में जुल्म को गलत करार दिया गया है।

मासूम बच्चों और महिलाओं को मारना न केवल कायराना हरकत है, बल्कि यह इसलामी नजरिए से भी जुल्म है। हमले के दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ऐसे लोग मुसलमान कहलाने लायक भी नहीं हैं।
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