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...झूठी किसी की कसम खाइए नहीं

Tue, 05 May 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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बीती रात मदरसा अनवारे मुस्तफा के निकट बज्म-ए-कहकशां के तत्वावधान में शानदार मुशायरा आयोजित हुआ। मुशायरे में आए दूर दराज के शायरों को सुनने के लिए बड़ी तादाद में भीड़ आखिर तक जमा रही।
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रात दस बजे नात पाक से शुरू हुए कार्यक्रम में मशहूर शायर रामप्रकाश बेखुद लखनवी ने इस शेर पर बेहद तारीफें बटोरीं ‘वोह एक ईंट जो बुनियाद है तेरे घर की, गलत हुई तो इमारत खराब कर देगी’। सलीम ताबिश ने यह पढ़ा ‘उस की तरक्कियों का सबब जान जाएगा, उस आदमी के पांव के छाले तलाश कर’।

फारूक आदिल का कलाम, तरन्नुम  व लखनवी अंदाज खूब सराहा गया ‘किसी का मशविरा तसलीम कर के देखिए साहब, किसी को मशविरा देना न मुश्किल है न आसां है’। सलमान जफर ने इस शेर पर बहनों का दर्द बयान किया ‘दरों दीवार से लिपटी हुई बचपन की यादों का, न जाने कैसे बहनें छोड़ कर ससुराल जाती हैं’।
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फैज खुमार बाराबंकी ने अपने कलाम व आवाज से दादा मशहूर शायर खुमार बाराबंकी की याद ताजा कर दी। उन्होंने पढ़ा- ‘वादा जो कीजिए तो खयाले वफा रहे, झूटी किसी के सिर की कसम खाइए नहीं’। इसके अलावा सिराज मंजर काकोरवी, शाद पीलीभीती, चांद पिहानवी, बेकल पिहानवी, डाक्टर रेहान तिलहर, अल्ताफ शाहाबादी, हकीम जीशान, वहीद शाहाबादी, हनीफ खां असर, इजहार शाहाबादी, इकबाल अकरम खीरी, नूर आजाद, सुल्तान अख्तर व साबिर शाहाबादी आदि ने भी कलाम पेश किया।

मुशायरे के आयोजक सलमान जफर थे। समापन पर बज्म कहकशां व आयोजक की ओर से आभार जताया गया। मुशायरे की अध्यक्षता अल्ताफ शाहाबादी व संचालन सुल्तान अख्तर ने किया। इस मौके पर डाक्टर नजर, हसीन, बब्बू, जमाल शाहनवाज, एमएफ कैफी आदि मौजूद थे।
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