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दीवाली पर मीठा जहर परोसने की तैयारी

Mon, 17 Oct 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
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बाजार में सज रही मिठाइयां । - फोटो : अमर उजाला
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हरदोई।  सावधान! दीवाली पर आपको मीठा जहर बेचने की तैयारी हो रही है। त्योहार के समय दाम बढ़ने की वजह से मिठाई कारोबारी अभी से खोया का स्टाक करने लगे हैं। सिंथेटिक खोया के साथ मानकविहीन रंगों और मिठास के लिए सैक्रीन का प्रयोग भी बडे़ पैमाने पर किया जाता है। शहर के छोटे और कसबाई दुकानदार इस खेल में बड़े पैमाने पर शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम शहरों में तो जांच करती है लेकिन कसबों तक बहुत ही कम जाती है। इससे मिलावट के कारोबार को जिले में पंख लग गए हैं।
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दीवाली पर जिले मेें लगभग 10 हजार क्ंिवटल मिठाई का कारोबार होता है। इसका फायदा उठाने में छोटे से लेकर बड़े मिठाई कारोबारी तक पीछे नहीं रहना चाहते हैं। दीवाली पर भारी मांग के चलते खोया भी महंगा हो जाता है। इसे देखते हुए मिठाई कारोबारी खोए का स्टाक करने लगे हैं। बासी खोए से बनी मिठाई में रंग मिलाकर ग्राहकों को लुभाया जाता है। ज्यादातर मिठाई कारोबारी रंग भी घटिया किस्म के ही डालते हैं।

ज्यादा कमाई के चक्कर मेें छोटे और कसबों के कारोबारी मिठाई में शक्कर की जगह सैक्रीन मिलाते हैं। इसके अलावा मिठाइयों में खोया के साथ पकी आलू और घुइयां भी मिला दी जाती है। ऐसी मिठाइयां धीमे जहर के समान हैं। इनके सेवन से लीवर और गुर्दों को नुकसान पहुंचता है। मुख्य निरीक्षक खाद्य एवं औषधि सुरक्षा सुरेश मिश्रा ने बताया कि अगर कहीं भी मिलावट की आशंका मिले तो लोगों को खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग में सूचना देनी चाहिए। मिठाइयों में मानकविहीन रंग मिलाना गलत है। लोग भी देख समझकर विश्वसनीय दुकानों से ही मिठाइयों और खाने पीने का सामान खरीदें। मिलावटखोराें के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है।  दीवाली  पर अभियान और तेज कर दिया जाएगा।
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बड़े दुकानदार दो तीन सप्ताह पहले खोया खरीदकर फ्रीजर में रखवा देते हैं। कसबों और गांवों के दुकानदार दो-तीन सप्ताह पहले दो तिहाई खोया खरीद लेते हैं। इस खोया में दो तिहाई से ज्यादा शक्कर मिलाकर कढ़ाई में मिश्रण बना देते हैं। इससे खोया में गंध आने की आशंका खत्म हो जाती है, किंतु फफूंद आदि लग जाती है। त्योहार के एक दो दिन पहले इस मिश्रण में कुछ ताजा खोया मिलाकर रंग बिरंगी मिठाई तैयार कर दी जाती है।

जिले में हरदोई शहर, संडीला, रैंसो, कछौना, श्रीमऊ (अरबल) , खेरिया, सेमरा चौराहा, बिलग्राम, पाली, सांडी, अतरौली, भरावन, बेेंहदर, कासिमपुर, बघौली में खोये बनाने का काम बड़ स्तर पर होता है। इन क्षेत्रों में सेंथिटक खोया भी बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। एक छोटी शीशी केमिकल से 20 लीटर दूध तैयार होता है। इस दूध में कुछ खोया मिलाकर कढाई में घोटकर सिंथेटिक खोया तैयार किया जाता है। इसी तरह दूध में दोगुना सिंथेटिक दूध मिलाकर पनीर तैयार किया जाता है।

जिला अस्पताल में तैनात डॉ. अमरजीत अजवानी ने बताया कि सैक्रीन और घटिया रंग मिठाई के साथ शरीर में जाते हैं। ये केमिकल पहले लीवर पर असर करते हैं फिर गुर्दों के सहारे पूरे शरीर में जाते हैं। इससे लोग पीलिया की चपेट में आ जाते हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो गुर्दे और लीवर भी डैमेज हो सकते हैं। डॉ. एके सिंह का कहना है कि सिंथेटिक खोया और मिठाई में मिलावट धीमे जहर के समान है। केमिकल, सकरीन मिली मिठाई का खाने से लीवर, गुर्दों के साथ हार्ट पर भी विपरीत असर पड़ता है।
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