हरदोई। दिवाली के एक दिन पहले शनिवार को छोटी दिवाली पर भी शहर की बाजारें ग्राहकों से पटी रहीं। बर्तनों की दुकानों से लेकर कपड़ों और मिठाई की दुकानें ग्राहकों से पटी रहीं। कुल मिलाकर दिवाली में लक्ष्मी जी के आगमन पर शहर रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया नजर आया तो लोग त्योहार के रंग में रंगे नजर आए।
धनतेरस के दिन व रात तो शायद ही कोई दुकानदार हो जो ग्राहकों की भीड़ छंटने के बाद निश्चिंत होकर बैठ पाया हो। शनिवार को भी कुछ ऐसा ही दिन रहा कि जहां पर बाजारों से लेकर मुख्य मार्ग तक खूब रौनक रही। खील-खिलौना की खूब बिक्री हुई। वहीं, पूजा के लिए फेरियों पर महिलाओं की भीड़ दिन भर लगी रही।
मिठाई विक्रेता सचिन राठौर का कहना है कि धनतेरस के दिन से लेकर अब तक मिठाई की मांग बढ़ रही है जिसको लेकर खोये की आपूर्ति बमुश्किल हो पा रही है। इसके अलावा ड्राई फ्रूटस की मांग भी बढ़ी है। इसके साथ ही दिवाली पर लक्ष्मी व गणेश जी के पूजन को लेकर पूजन सामग्री की बिक्री हाथों-हाथ हुई। बताया कि छोटी दिवाली पर पूजन से संबंधित सामग्री जैसे गणेश लक्ष्मी, मोमबत्तियाें, दियों आदि की बिक्री खूब हुई।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि विधि विधान से यदि मां लक्ष्मी का पूजन किया जाए तो पूजन करने वालों को ज्यादा लाभ हो सकता है। बताया कि पूजन में स्वास्तिक चिन्ह का भी महत्व है। अनुष्ठान से पहले दीवार पर इस चिन्ह को बनाया जाता है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम चारों तरफ इसका प्रयोग किया जा सकता है।
केसर, हल्दी या सिंदूर से इसको पूजन पाठ की जगह पर तैयार किया जाता है। दीपों के पर्व पर कौड़ी की भी अपनी एक अहम भूमिका है। पूजन की थाली में कौड़ी रखने की पंरपरा है। कहा जाता है कि कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन लाभ होता है।
इसके अलावा लच्छा का भी सामग्री के रूप में विशेष महत्व है। संगठन की शक्ति का प्रतीक पूजन केसमय कलाई पर इसको बांधा जाता है। तिलक भी इस पूजन में विशेष महत्व रखता है। रोली या बंदन से किया गया तिलक ज्ञान व बुद्धि को प्रखर करता है। इसी क्रम में पान व चावल का भी पूजन में विशेष महत्व है।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी व सनत मिश्र ने बताया कि दिवाली पूजन का मुख्य काल प्रदोष काल माना गया है। इस दिन प्रदोष काल रहने से स्थिर लगभन में और ज्यादा बलवती हो जाएगी। लक्ष्मी-गणेश पूजन का मुर्हूत रविवार को शाम 4:55 से शुरू होगा 8:55 बजे तक रहेगा। दीपदान के लिए शाम 6:15 बजे से शुभ मुहूर्त है।
प्रकाश पर्व को टोटकों का भी पर्व कहा जाता है। सुनील शास्त्री कहते हैं कि लक्ष्मी पूजा के समय पांच लक्ष्मीकारक कौड़ियों व आम की लकड़ी का अलग-अलग स्वास्तिक बनाएं। दोनों की धूपबत्ती से अलग अलग पूजा करें। इसके बाद दूसरे दिन लक्ष्मीकारक कौड़ियों को अपनी तिजोरी में लाल कपड़ों में बांधकर रखने एवं अपने प्रतिष्ठानों में रखने से बरकत होती है। आम स्वास्तिक को मुख्यद्वार पर लटकाने से लाभ होने का दावा किया जाता है। इसी क्रम में टोटकों में इस बात को भी शामिल किया गया है, जिसमें ढक्कन वाले चांदी के कलश को लें और उसको गंगाजल से भर दें। मुंह को कलावे से बांध दें। ढक्कन लगाने के बाद इसको स्थापित कर दें, निश्चित रूप से धन का लाभ होता है। इसी क्रम में लाल रंग का रिबन तांबे के सिक्के के साथ मुख्य द्वार पर बंाधने से घर में धन की बृद्धि होती है।
शास्त्री सनत मिश्रा ने बताया कि दिवाली पर शंख का पूजन करने के बाद यदि मंत्रों का विधिवत जाप किया जाए तो मनोकामना पूर्ण हो सकती है। ऊं श्री क्लीं ब्लूं सुदक्षिणावर्त शंखाय नम का पाठ करके लाल कपड़े पर चांदी या सोने के आधार पर शंख को रख दें।
आधार रखने से पहले चावल और गुलाब के फूल रख दें। इसके बाद 108 बार इस मंत्र का जप करें। ज्योतिष विद्या के जानकारों का कहना है कि मान्यता यह भी है कि सुबह10 से लेकर दोपहर 12 बजे तक इन मंत्रों का सवा महिने तक लगातार जाप करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। दोपहर 12 से तीन बजे तक करने से कीर्ति व यश में वृृद्धि होती है। इसके अलावा तीन से छह के बीच जाप करने से संतान सुख की प्राप्ति के भी योग बताए जाते हैं।