हरदोई। भारत को ऋषि और मुनियों का देश कहा जाता है। वे वनों में तपस्या में लीन रहते हैं। भौतिकतावाद ने भारतीय संस्कृति को आहत करते हुए इन वनों को ही काट डाला। इससे देवी देवताओं का स्थान छिन गया। पर्यावरण से छेड़छाड़ करने के बाद सूखा व बाढ़ की आपदा से भी मनुष्यों को सामना करना पड़ रहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर रविवार को कोयलबाग कालोनी के वन प्रभाग में आयोजित गोष्ठी में एसडीओ हरदोई रेंज बीआर पाल ने कहा कि धरती का औसतन तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। अनुमान है कि धरती का तापमान बढ़ने से भारत में ही धरती का तापमान पांच छह डिग्री ऊपर जा सकता है। ग्लेशियर का तेजी से पिघलना इसका परिचायक है जिससे पानी संकट नजर आ रहा है। लोगों को बाढ़ व सूखे का खतरा भी उत्पन्न होता जा रहा है फिर भी लोग इसको लेकर चेत नहीं रहे हैं।
एसडीओ संडीला जीसी त्रिपाठी ने कहा कि पृथ्वी एक अद्भुत उपग्रह है। इसमें जीवन के लिए समस्त तत्व उपलब्ध हैं। लेकिन मनुष्य अपनी कार्यशैलियों से लगातार इसमें जगह घोल रहा है। रेंजर हरदोई वीएस सचान ने कहा कि विश्व पर्यावरण की शुरूआत पांच जून 1972 को स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में की गई। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में भी लोगों को जानकारी दी। संचालन उप वन रेंजन रत्नेश श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान परिसर में पौधे भी रोपित किए गए। इस मौके पर कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।